देश की खबरें | पहलगाम हमला : पर्यटकों को बचाने के लिए खच्चर वाला, गाइड, स्थानीय लोग ‘फरिश्ता’ बनकर सामने आये
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. एक खच्चर वाला जिसने अपने गृह राज्य आने वाले पर्यटकों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी, एक गाइड जिसने 11 लोगों के एक परिवार को बचाया और अनगिनत स्थानीय निवासी उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने कश्मीर के आतिथ्य को उस समय एक नया आयाम दिया, जब मंगलवार को पहलगाम में आतंकवादियों ने निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाया।
नयी दिल्ली, 25 अप्रैल एक खच्चर वाला जिसने अपने गृह राज्य आने वाले पर्यटकों को बचाने के लिए अपनी जान दे दी, एक गाइड जिसने 11 लोगों के एक परिवार को बचाया और अनगिनत स्थानीय निवासी उन लोगों में शामिल हैं जिन्होंने कश्मीर के आतिथ्य को उस समय एक नया आयाम दिया, जब मंगलवार को पहलगाम में आतंकवादियों ने निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाया।
पर्यटकों पर हुए बर्बर हमले को लेकर जहां एक तरफ देश भर में रोष देखने को मिला, वहीं स्थानीय लोगों द्वारा उन लोगों की मदद करने की कहानियां भी सामने आने लगीं जो भयावह स्थिति में फंसे हुए थे।
ये कहानियां उन लोगों से जुड़ीं है, जिन्होंने आतंकी हमले के दौरान ‘‘फरिश्ता’’ बनकर पर्यटकों की जान बचाई और उनके सबसे बड़े संकट के समय मदद का हाथ बढ़ाया था।
जब आतंकी हमले के पीड़ितों की प्रारंभिक सूची सार्वजनिक की गई, तो सैयद आदिल हुसैन शाह का नाम ही स्थानीय लोगों में से एक था। उनकी बहादुरी की कहानी सुनकर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत हजारों लोग बुधवार को पहलगाम के एक गांव में उनके जनाजे में शामिल हुए।
जब कौस्तुभ गनबोटे और संतोष जगदाले नामक दो पीड़ितों के परिवार हथियारबंद आतंकवादियों के सामने खड़े थे, तो 30 वर्षीय खच्चर वाला शाह ने उनसे पूछा कि वे निर्दोष लोगों को क्यों मार रहे हैं। पर्यटकों की रक्षा करने के साहसी प्रयास में, शाह ने हथियार छीनने की कोशिश की। आतंकियों ने शाह की छाती में तीन गोलियां मारीं, जिससे उनकी मौत हो गयी।
संतोष जगदाले की बेटी असावरी जगदाले बताया कि जब वे लोग इस अफरातफरी से बचकर निकले तो एक अन्य खच्चर वाले ने उनकी मदद की थी।
पुणे से पहलगाम गईं असावरी ने बताया, ‘‘मैंने हिम्मत जुटाई और अपनी मां और अन्य रिश्तेदार के साथ भागने में कामयाब रही। नीचे उतरते समय मेरी मां के पैर में चोट लग गई। एक खच्चर वाले ने हमें सहारा दिया और उम्मीद जगाई। वह हमें खच्चर पर बैठाकर हमारे चालक के पास तक ले गया।’’
असावरी ने ‘पीटीआई-’ को बताया कि उनके कैब चालक और खच्चर वाला ‘‘ईश्वर के भेजे गए फरिश्तों की तरह थे जो हमले के समय उनके साथ खड़े रहे। खच्चर वाले ने हमारा साथ नहीं छोड़ा, वह हमारे साथ था। उसने मेरी मां, एक रिश्तेदार और मुझे मौके से बचाया।’’
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