ताजा खबरें | विपक्ष ने दंड प्रक्रिया शिनाख्त विधेयक को मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया, शाह ने जरूरी बताया
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने ब्रिटिश काल के बंदी शिनाख्त कानून की जगह केंद्र सरकार द्वारा लाये जा रहे नये कानून को ‘क्रूर’ और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया और दावा किया कि सरकारी तंत्र द्वारा इसका दुरूपयोग किया जायेगा।
नयी दिल्ली, चार अप्रैल कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने ब्रिटिश काल के बंदी शिनाख्त कानून की जगह केंद्र सरकार द्वारा लाये जा रहे नये कानून को ‘क्रूर’ और संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया और दावा किया कि सरकारी तंत्र द्वारा इसका दुरूपयोग किया जायेगा।
विपक्षी सदस्यों ने सोमवार को लोकसभा में इस विधेयक को विचारार्थ संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग की। वहीं, भाजपा ने विधेयक को लेकर विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि इसे राजनीति के चश्मे से ऊपर उठकर देखना चाहिए क्योंकि नए-नए अपराध सामने आने और अपराधियों द्वारा नए तौर-तरीके अपनाने को ध्यान में रखते हुए जांच एजेंसियों को सबल बनाना जरूरी है।
निचले सदन में ‘दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक, 2022’ को लोकसभा में चर्चा एवं पारित करने के लिए रखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार एक नया ‘मॉडल कारागार मैनुअल’ बना रही है जिसमें कैदियों के पुनर्वास, महिला कैदियों के लिए अलग जेल और खुली जेल समेत अनेक बिंदुओं को समाहित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि ‘दंड प्रक्रिया (शिनाख्त) विधेयक, 2022’ को पृथक रूप से देखने के बजाय भावी मॉडल जेल मैनुअल के साथ देखना होगा।
उन्होंने कहा कि 1920 के कानून की जगह नये कानून से अदालतों में दोषसिद्ध करने के लिए प्रमाणों को बढ़ाया जा सकेगा।
शाह ने कहा कि यह विधेयक लाने का सही समय है जिसमें काफी देरी हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि राज्यों से चर्चा करने एवं सुझावों को समाहित करते हुए और दुनियाभर में अपराध प्रक्रिया में दोषसिद्धि के लिए इस्तेमाल अनेक प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद यह विधेयक लाया गया है।
गृह मंत्री ने कहा कि इसमें मानवाधिकार हनन संबंधी सदस्यों की चिंताओं पर ध्यान दिया गया है। शाह ने कहा कि कानून में समय पर बदलाव नहीं करेंगे तो दोषसिद्धि की दर में हम पीछे रह जाएंगे।
चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि 1920 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार आजादी के आंदोलन में भाग लेने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को डराने और धमकाने के मकसद से बंदी शिनाख्त कानून लाई थी जिसकी मंशा स्वतंत्रता आंदोलन को कमजोर करने की थी।
उन्होंने कहा, ‘‘ आज 102 वर्ष बाद यह सरकार नया कानून लाई है और दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि यह संविधान में प्रदत्त मूलभूत अधिकारों का हनन करता है।’’
तिवारी ने नये विधेयक में जैविक नमूनों और उनके विश्लेषण संबंधी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए इस बाबत परि को अस्पष्ट बताया और कहा कि क्या इसका मतलब है कि आरोपी की ब्रेन मैपिंग और नार्को विश्लेषण भी हो सकता है।
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