ताजा खबरें | विपक्ष ने राज्यों की एसटी सूची से जुड़ी सिफारिशें स्वीकारने को कहा

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. विपक्ष ने शुक्रवार को लोकसभा में सरकार से आग्रह किया कि वह कई जातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने संबंधी कुछ प्रदेशों की ओर से की गई अनुशंसा को स्वीकार करे तथा सार्वजनिक इकाइयों का निजीकरण बंद करे ताकि पात्र समुदायों को आरक्षण का लाभ मिलता रहे।

नयी दिल्ली, एक अप्रैल विपक्ष ने शुक्रवार को लोकसभा में सरकार से आग्रह किया कि वह कई जातियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने संबंधी कुछ प्रदेशों की ओर से की गई अनुशंसा को स्वीकार करे तथा सार्वजनिक इकाइयों का निजीकरण बंद करे ताकि पात्र समुदायों को आरक्षण का लाभ मिलता रहे।

दूसरी तरफ, भाजपा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आदिवासियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की भावना से काम हो रहा है।

संसद के निचले सदन में जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने ‘संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां) आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2022’ को चर्चा और पारित कराने के लिए रखा।

इस विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद दीपक बैज ने कहा कि लोग आरक्षण इसलिए मांगते हैं ताकि उन्हें शिक्षा मिले और नौकरी मिले। उन्होंने कहा कि देश में आज कई जातियां आदिवासियों के आरक्षण के लिए बाट जोह रही हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ समेत कई प्रदेशों से प्रस्ताव आए हैं कि कई जातियों को आरक्षण मिलना चाहिए और केंद्र सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सल समस्या पर भी ध्यान देना चाहिए।

बैज ने कहा कि सरकार को निजीकरण बंद करना चाहिए ताकि एससी-एसटी को आरक्षण का लाभ मिलता रहे।

उन्होंने कहा, ‘‘बार-बार ऐसे बयान आते हैं कि आरक्षण समाप्त होना चाहिए। हमारी मांग है कि आरक्षण पर कोई पुनर्विचार नहीं होना चाहिए।’’

भाजपा के जगदंबिका पाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के चार जिलों में कुछ जातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग वर्षों से लंबित थी और हमारी सरकार इसे पूरा कर रही है। उन्होंने कहा कि इन जातियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने से इनके विकास में मदद मिलेगी।

पाल ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार आदिवासियों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा यह विधेयक और कई अन्य कदम इसी से जुड़े हैं।

भाजपा सांसद ने कहा कि आदिवासियों के लिए सरकार ने बजट बढ़ाया है। यह ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की राजनीति है।

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