देश की खबरें | नए राज्यसभा सदस्यों के लिए आयोजित प्रशिक्षण सत्र में 60 में से सिर्फ 20 सांसद ही पहुंचे
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नयी दिल्ली, 31 जुलाई राज्यसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पहली बार निर्वाचित करीब 60 में सिर्फ 20 सदस्यों ने ही हिस्सा लिया।
सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।
राज्यसभा सचिवालय की ओर से आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वरिष्ठ सांसदों की तरफ से नए सांसदों को संसदीय कार्यवाही, नियमों और कानूनों के साथ ही संसदीय तौर तरीकों के बारे में बताया जाता है।
सूत्रों ने बताया कि 30 और 31 जुलाई को हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 30 नवनिर्वाचित सांसदों में सिर्फ तीन ने ही इसमें हिस्सा लिया। तृणमूल कांग्रेस का एक ही नवनिर्वाचित सांसद है और उसने भी इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया।
आम आदमी पार्टी के सात में सिर्फ दो ही सांसद पहुंचे जबकि जनता दल यूनाईटेड के दो सदस्यों ने इसमें शिरकत की। वाम दलों के पांच सांसदों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
प्रख्यात धाविका और राज्यसभा के लिए मनोनीत की गई पी टी ऊषा एकमात्र सांसद थीं जिन्होंने दो दिन बैठकों में हिस्सा लिया और सभी सत्रों के दौरान वह उपस्थित रहीं। प्रत्येक सत्र करीब 45 मिनट का था।
विपक्ष के एक नेता ने कहा, ‘‘यह शर्मनाक है कि नवनिर्वाचित सांसदों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने की औपचारिकता को पूरा नहीं किया। खासकर, भाजपा के सदस्यों ने, जिसके 30 सांसदों में केवल तीन ही पहुंचे।’’
सूत्रों ने बताया कि भाजपा ने राज्यसभा सचिवालय से आग्रह किया था कि वह इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को 23 और 24 जुलाई को आयोजित कर लें क्योंकि उसके सांसदों को 30 और 31 जुलाई को पहले से ही निर्धारित एक कार्यक्रम में शामिल होना है। हालांकि बात नहीं बन सकी क्योंकि राज्यसभा सचिवालय ने मुख्य वक्ताओं को समय दे दिया था।
मुख्य वक्ताओं में भाजपा के वरिष्ठ नेता लक्ष्मीकांत वाजपेयी और भूपेंद्र यादव शामिल थे। उन्होंने विधेयकों के बारे में अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन ने जन हित के मुद्दे उठाने के बारे में नवनिर्वाचित सांसदों को बताया वहीं कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने संसदीय विशेषाधिकारों के बारे में अपनी राय रखी। कांग्रेस के ही जयराम रमेश ने भारतीय लोकतंत्र में राज्यसभा की भूमिका और उसके योगदान पर जानकारी साझा की। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की वंदना चव्हाण ने विभिन्न संसदीय समितियों के बारे में अपने विचार व्यक्त किए।
राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने शनिवार को नवनिर्वाचित और मनोनीत सदस्यों को सदन में बेहतर प्रदर्शन करने, सुधार करने और समाज में बदलाव लाने का सुझाव दिया था।
उन्होंने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सदस्यों से सदन में नियमित रूप से उपस्थित रहने का भी सुझाव दिया था।
उन्होंने कहा था, ‘‘गरिमा, अनुशासन, समर्पण, प्रतिबद्धता से ही आप बेहतर बन सकेंगे।’’
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