देश की खबरें | ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’: असम और गोवा के मुख्यमंत्रियों ने किया समर्थन, कांग्रेस सांसद ने कहा- चुनावी तिकड़म

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की संभावना तलाशने के लिए एक समिति गठित करने के लिए केंद्र की सराहना की। दूसरी ओर राज्य के विपक्षी दलों ने “जल्दबाजी” में समिति गठित करने पर सवाल उठाए और इसे देश के संघीय ढांचे को तोड़ने का प्रयास बताया।

गुवाहाटी/पणजी/श्रीनगर, एक सितंबर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की संभावना तलाशने के लिए एक समिति गठित करने के लिए केंद्र की सराहना की। दूसरी ओर राज्य के विपक्षी दलों ने “जल्दबाजी” में समिति गठित करने पर सवाल उठाए और इसे देश के संघीय ढांचे को तोड़ने का प्रयास बताया।

शर्मा ने नागांव में एक कार्यक्रम के मौके पर पत्रकारों से कहा, “आज, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समिति की नियुक्ति करके एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुझे खुशी है कि रामनाथ कोविंद जी जैसे कद के व्यक्ति ने प्रधानमंत्री के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।”

केंद्र सरकार ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की संभावना तलाशने के लिए पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है, जिससे लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव साथ होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

कांग्रेस नेता देबब्रत सैकिया ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा, ''इतनी जल्दबाजी में इसे बनाने की कोई जरूरत नहीं थी।''

उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि कुछ गलत मकसद है। संसद का एक विशेष सत्र बुलाया गया है। अगर इसे (एक साथ चुनाव कराने का विधेयक) पेश किया जाता है, तो यह निश्चित रूप से दिखाएगा कि राजनीति से प्रेरित है।”

रायजोर दल के उपाध्यक्ष रसेल हुसैन ने आरोप लगाया कि मौजूदा परिस्थितियों में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की अवधारणा उत्तर-मध्य भारत की हिंदी पट्टी को निर्णायक बनाने और देश के संघीय ढांचे को तोड़ने का एक प्रयास है।

उन्होंने आशंका व्यक्त की कि एक बार जब देश भर में निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन हो जाएगा, तो हिंदी पट्टी कहे जाने वाले उत्तर और मध्य भागों में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ जाएगी।

हुसैन ने कहा, “परिणामस्वरूप, हिंदी पट्टी के मुद्दे राजनीतिक विमर्श पर हावी रहेंगे। लेकिन वास्तव में, एक राज्य के मुद्दे दूसरे राज्य से अलग हैं। और इससे कम प्रतिनिधित्व वाले क्षेत्रों और राज्यों की समस्याएं हावी हो जाएंगी।”

वहीं, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस प्रस्ताव का शुक्रवार को समर्थन किया।

उन्होंने दावा किया कि इससे काफी समय और जनशक्ति बचेगी।

सावंत ने पत्रकारों से कहा कि बार-बार चुनाव होने के चलते चुनावी मशीनरी पर काफी खर्च भी होता है।

इस बीच, कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य अखिलेश प्रसाद सिंह ने शुक्रवार को कहा कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की केंद्र सरकार की अवधारणा एक “चुनावी तिकड़म है।”

सिंह ने श्रीनगर में पत्रकारों से कहा, “यह चुनावी तिकड़म है। कोई भी एक राष्ट्र, एक चुनाव लागू नहीं कर सकता।”

सिंह शिक्षा, महिला, बच्चे, युवा और खेल संबंधी संसदीय समिति का हिस्सा हैं। समिति जम्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर है।

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