ग्यिरोंग बॉर्डर के पास अब अरबों लीटर पानी वाली झील से नया खतरा
शुरुआती जांच के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत आपदा के दौरान शुरू के 30 मिनट में ही बाढ़ का जलस्तर 9 मीटर ऊंचा हो गया.
शुरुआती जांच के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत आपदा के दौरान शुरू के 30 मिनट में ही बाढ़ का जलस्तर 9 मीटर ऊंचा हो गया. मलबा, बोल्डर और विध्वंसक ताकत इसी पानी में छुपे थे.नेपाल और तिब्बत में 26 अगस्त को आई विकराल प्राकृतिक आपदा के बाद, एक तरफ खौफ के साये में राहत और बचाव का काम चल रहा है, तो दूसरी तरफ कई देशों के वैज्ञानिक भी अपने अपने दफ्तरों में बेहद व्यस्त नजर आ रहे हैं. उनकी मेजों और कंप्यूटरों में सैटेलाइट तस्वीरें, हादसे के वीडियो और ग्राउंड लेवल का डाटा है. इन सबकी मदद से वे जानना चाहते हैं कि ग्यिरोंग बॉर्डर के पास ये भयानक आपदा आखिर कैसे ट्रिगर हुई. बुधवार की आपदा के दौरान 30 मिनट के भीतर पानी की नौ मीटर ऊंची दीवार खड़ी हो गई.
हादसे से ठीक पहले अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने नेपाल-तिब्बत के ग्यिरोंग बॉर्डर के पास 5.2 तीव्रता वाला भूकंप दर्ज किया. इस डाटा और सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करने के बाद ऑस्ट्रिया की ग्रात्स यूनिवर्सिटी के भूविज्ञानी याकोब श्टाइनर कहते हैं, "ग्लेशियर का निचला हिस्सा ढह गया. अगर आप तस्वीरें देखेंगे तो ऐसा दिखेगा जैसे किसी ने बड़े से चाकू से पूरा निचला हिस्सा काटकर कर गिरा दिया हो."
श्टाइनर के मुताबिक, इतनी ऊंचाई से गिरी ग्लेशियर बर्फ का बड़ा हिस्सा, वैसा ही असर करता है जैसे बम धमाका करता है. श्टाइनर के मुताबिक, नेपाल तिब्बत के इस इलाके में आपदाओं का इतिहास रहा है. इसी घाटी के आस पास 2024 में बर्फ और चट्टानें वाला हिमस्खलन हुआ. 2025 में भी एक ग्लेशियर झील से बाढ़ उपजी.
आपदा के संभावित कारणों के बारे में क्या कह रहे हैं नेपाली वैज्ञानिक
शाश्वत सान्याल, इंटनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट से जुड़े वैज्ञानिक हैं. काठमांडू में रहने वाले जलवायु रिसर्च ग्रुप के वैज्ञानिक सान्याल कहते हैं कि आपदा के ठोस कारण अभी पता नहीं चले हैं, लेकिन शुरुआती जानकारियां कुछ संकेत दे रही हैं. मसलन, आपदा केंद्र से जुड़ी नदियों में आधे घंटे के भीतर जलस्तर 29.5 फीट बढ़ गया. सान्याल के मुताबिक, "यह बहुत ही ज्यादा वृद्धि थी, वो भी इतने कम समय में जलस्तर में इतना बड़ा इजाफा."
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प्राथमिक सबूत संकेत दे रहे हैं कि ल्हेदे खोला में विशाल मात्रा में बर्फ और पत्थर गिरे. ल्हेदे खोला, भोते कोशी नदी में मिलता है और ये नदी आगे जाकर त्रिशूली नदी में घुलती है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस अथाह मलबे ने पानी में एक भीषण छपाक पैदा की. इस छपाक के साथ पानी, कीचड़ और बोल्डरों से भरा मलबा भारी मात्रा में उछला और तबाही शुरू हुई.
वैज्ञानिक अभी इस बात के भी सबूत जुटा रहे हैं कि क्या इस मलबे ने भूते कोशी नदी को कुछ देर के लिए बांध दिया और जब वह अस्थायी बांध फटा तो तबाही और विकराल हो गई.
नेपाल और चीन ने दी एक और संभावित तबाही की चेतावनी
राहत और बचाव कार्यों के बीच नेपाल के आपदा प्रबंधन विभाग ने गुरुवार को एक नई चेतावनी जारी की. नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, आपदा के शुरुआती क्षेत्र में मलबे के कारण एक झील बन चुकी है, जो कभी भी फट सकती है. स्थानीय लोगों और राहतकर्मियों से अपील की गई है कि वे नदी तट से दूर रहें.
ऐसी ही चेतावनी गुरुवार को चीनी अधिकारियों ने भी दी. चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक नेपाली क्षेत्र में नदी पर एक झील बन गई है. चीनी अधिकारियों का अनुमान है कि झील में 20 लाख घनमीटर पानी जमा हो चुका है. और जल्द ही 30 लाख घनमीटर पानी और इकट्ठा हो जाएगा. चीन के सरकारी टेलीविजन में प्रसारित वीडियो में दिख रहा है कि झील के ऊपरी हिस्से से पानी ओवरफ्लो होने लगा है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 28, 2026 11:40 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

