देश की खबरें | अब निरंकुशता पर कुछ हद तक लगाम है: लोकसभा चुनाव के परिणाम पर विक्रम सेठ ने कहा
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नयी दिल्ली, 22 जून प्रख्यात लेखक-कवि विक्रम सेठ ने लोकसभा चुनाव के नतीजों का हवाला देते हुए शुक्रवार को कहा कि एक महीने पहले की तुलना में ‘‘हम बेहतर स्थिति में हैं’’ और इससे देश में ‘‘निरंकुशता पर कुछ हद तक लगाम’’ लगेगी।
‘हनुमान चालीसा’ के अनुवाद के विमोचन के मौके पर सेठ ने तर्क दिया कि ‘‘काफी हद तक धर्मनिरपेक्ष’’ नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू चीजों पर उसी तरह नियंत्रण रखेंगे, जिस तरह तत्कालीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में समता पार्टी और जॉर्ज फर्नांडीस ने किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हम एक महीने पहले की तुलना में अब बेहतर स्थिति में हैं, जैसा कि कहा गया कि ‘यह तो आने वाले समय का एक ट्रेलर है। कम से कम अब निरंकुशता पर कुछ हद तक लगाम लगी है और ‘एन और एन’ के द्वारा दोनों तरफ संतुलन है। नायडू और नीतीश काफी हद तक धर्मनिरपेक्ष हैं। देखते हैं आगे क्या होता है।’’
विभिन्न पुरस्कार से सम्मानित लेखक ने कहा, ‘‘राजग में पहली सरकार में समता पार्टी, जॉर्ज फर्नांडीस थे, जो न केवल धर्मनिरपेक्ष थे, बल्कि ईसाई भी थे। इसलिए, मुझे लगता है कि जो शरारतें की जा सकती थीं, उन पर एक तरह की सीमाएं थीं।’’
चुनाव में भाजपा ने 240 सीट जीतीं, जो 272 के बहुमत के आंकड़े से कम थीं लेकिन सहयोगियों के माध्यम से कुल 286 सीट के साथ सरकार बनाने में कामयाब रही।
यह 2019 और 2014 में जीती गई 303 और 282 सीट से काफी कम है, जब भाजपा को अकेले बहुमत मिला था। हालांकि, सेठ (72) ने आगाह किया कि ‘‘समस्या’’ अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि आज लोग ‘‘अपनी बात कहने से डरते हैं।’’
सेठ ने लेखिका अरुंधति रॉय का उदाहरण भी दिया, जिनके खिलाफ 2010 में उनके कथित भड़काऊ भाषणों के लिए कठोर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। सेठ ने कहा, ‘‘देखिए, अरुंधति के साथ अब क्या हो रहा है। यह बेवकूफी है।’’
उन्होंने कहा कि एक भारतीय को दूसरे के खिलाफ खड़ा करना ‘‘अपने देश को कमजोर करने के लिए सबसे खराब काम है।’’
हिंदू देवी-देवताओं, विशेषकर हनुमान की बदलती छवि के बारे में पूछे जाने पर सेठ ने कहा कि इसका भी राजनीति से अधिक और भक्ति से कम लेना-देना है। उन्होंने कहा कि हनुमान को पहले भगवान राम और सीता के चरणों में दिखाया जाता था, अब उन्हें केसरिया और भौंहें तनी हुई अवस्था में, एक अलग छवि में दिखाया जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘वे हनुमान के पहलू का प्रयोग करते हैं, जो भक्ति पहलू नहीं है। ‘सूक्ष्म रूप धरी सियाहिं दिखावा’ नहीं, बल्कि ‘विचित्र रूप धरी लंक जरावा’ दिखाते हैं।’’
दरअसल, चुनाव के दौरान ‘हनुमान चालीसा’ अनुवाद को राजनीतिक रंग दिए जाने के डर से उन्होंने इसका विमोचन टालने का फैसला किया। अनुवाद की यह किताब पहले हनुमान जयंती पर जारी होने वाली थी।
सेठ ने कहा, ‘‘मैंने सोचा कि अगर मैं ऐसा करूंगा तो इसे चुनाव में भी घसीटा जाएगा और वे कहेंगे यह आदमी अंधकार की ओर चला गया है या कुछ और...फिर मैंने सोचा कि चलो बाद में करते हैं।’’
एक दशक में अपनी पहली पुस्तक हनुमान चालीसा के अनुवाद के बारे में सेठ ने कहा कि यदि 10 प्रतिशत लोगों को भी मूल अनुवाद से आनंद मिलता है तो यह उनके लिए ‘‘पर्याप्त’’ होगा। सेठ ने इस अनुवाद को अपनी पुस्तक ‘‘ए सूटेबल बॉय’’ के प्रतिभाशाली बालक भास्कर को समर्पित किया है, जिसने पांच वर्ष की उम्र में हनुमान चालीसा याद कर ली थी।
सेठ ने यह भी बताया कि अनुवाद कैसे अस्तित्व में आया। उन्होंने कहा, ‘‘मेरी 90 वर्षीय उषा मामी, जो भूतल पर रहती हैं, उन्हें मैंने अपना अनुवाद दिखाया था। उन्होंने कहा, ‘बेटा, तुम्हें इसे सिर्फ मेरे साथ ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों के साथ भी साझा करना होगा।’ मैंने कहा कि इसे निजी रूप से अनुवाद किया है। मैंने इसे 10 साल पहले किया था...उसके बाद मैंने इसे हाथ नहीं लगाया।’’
तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा में 40 चौपाइयां हैं। सेठ की किताब को ‘स्पीकिंग टाइगर’ ने प्रकाशित किया है।
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