देश की खबरें | पाटण जिले में सरकारी अस्पताल की स्थिति से संबंधित पूर्व मंत्री की याचिका पर सरकार को नोटिस

अहमदाबाद, पांच जून गुजरात उच्च न्यायालय ने भाजपा सरकार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री द्वारा पाटण जिले के सिद्धपुर में संचालित सरकारी अस्पताल के प्रबंधन और प्रशासन में ‘‘दया भाव की कमी’’ पर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

मुख्य न्यायाधीश ए. जे. देसाई और न्यायमूर्ति बिरेन वैष्णव की खंडपीठ ने नोटिस जारी करके 26 जून तक जवाब मांगा है।

याचिका दायर करने वाले जयनारायण व्यास सिद्धपुर सीट से पूर्व विधायक हैं और 2007 से 2012 तक तत्कालीन नरेन्द्र मोदी सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री रहे थे। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले व्यास भाजपा छोड़कर विपक्षी दल कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

जनहित याचिका में व्यास ने कहा है कि सिद्धपुर में 2012 में सरकारी सदर और कैंसर अस्पतालों का निर्माण हुआ लेकिन पाटण जिले में स्थित दो महत्वपूर्ण अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और तकनीशियन के कई पद अभी भी रिक्त हैं।

जनहित याचिका में कहा गया है कि किडनी सेंटर, आयुर्वेदिक अस्पताल और होम्योपैथी कॉलेज के एक साथ होने की महत्वपूर्ण और प्रशंसनीय महत्वाकांक्षा के बावजूद ‘‘(एक-दूसरे के पास स्थित) इन अस्पतालों के प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े प्राधिकारों में दयाभाव की कमी है।’’

आवेदक ने कहा है कि अस्पताल ‘‘पिछले करीब 10 साल से पूरी तरह खाली पड़े हैं, वहां कुछ नहीं है, इससे उत्तरी गुजरात और पड़ोसी राजस्थान के गरीब मरीजों को असुविधा हो रही है।’’

याचिका में कहा गया है कि सदर अस्पतालों में 10 स्वीकृत पदों में से पांच रिक्त हैं। किडनी केन्द्र के लिए स्वीकृत चिकित्सक के सभी सात पद रिक्त हैं और कैंसर अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट के सभी पद रिक्त हैं।

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