अगर इस व्यक्ति को आधिकारिक रूप से संक्रमित घोषित किया जाता है तो यह उत्तर कोरिया में कोरोना वायरस का पहला पुष्ट मामला होगा।
उत्तर कोरिया लगातार यह कहता रहा है कि उसके देश में संक्रमण का एक भी मामला नहीं है। हालांकि विदेशी विशेषज्ञ उसके इस दावे पर सवाल उठाते रहे हैं।
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‘कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी’ ने बताया कि लॉकडाउन की घोषणा शुक्रवार दोपहर को की गई। यह संदिग्ध मामला ऐसे शख्स का है जो बरसों पहले दक्षिण कोरिया भाग गया था और गत सप्ताह गैरकानूनी रूप से सीमा पार कर उत्तर कोरिया में घुसा।
केसीएनए ने बताया कि जांच से पता चलता है कि यह व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हो सकता है।
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उसने बताया कि संदिग्ध मरीज और पिछले पांच दिनों में केसोंग में उसके संपर्क में आए लोगों को पृथक-वास में रखा गया है।
वायरस विरोधी प्रयासों को ‘‘राष्ट्रीय अस्तित्व का मामला’’ बताते हुए उत्तर कोरिया ने इस साल की शुरुआत में सभी सीमाओं को बंद कर दिया था, विदेशी पर्यटकों पर पाबंदी लगा दी थी और स्वास्थ्य कर्मियों से किसी भी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण पाए जाने पर उसे पृथक-वास में रखने को कहा गया था।
बहरहाल केसोंग में लगाया गया लॉकडाउन देश में पहला ऐसा कदम है जो इस संक्रमण को रोकने के लिए उठाया गया है।
विदेशी विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया में कोरोना वायरस फैलने के गंभीर नतीजे हो सकते हैं, क्योंकि उसकी स्वास्थ्य व्यवस्था बहुत जर्जर है और उसके पास चिकित्सा सामान का अभाव है।
करीब 2,00,000 लोगों की आबादी वाला केसोंग शहर दक्षिण कोरिया के साथ लगती सीमा के उत्तर में स्थित है।
केसीएनए के अनुसार शनिवार को पोलितब्यूरो की आपात बैठक में किम ने केसोंग इलाके में आपात स्थिति की घोषणा भी की।
उसने किम के हवाले से कहा, ‘‘ यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें क्रूर वायरस के देश में प्रवेश करने की आशंका है।’’
एजेंसी ने बताया कि किम ने कहा कि उन्होंने ‘‘24 जुलाई के बाद से केसोंग शहर को पूरी तरह बंद करके और हर जिले एवं क्षेत्र का एक-दूसरे से संपर्क समाप्त करके रोकथाम संबंधी कदम उठाया है।’’
बैठक में सीमावर्ती इलाके पर सुरक्षाकर्मियों की चूक पर भी चर्चा की गई, जिसके चलते संदिग्ध मरीज सीमा पार करके उत्तर कोरिया में घुसा।
दक्षिण कोरिया सरकार ने अभी उत्तर कोरिया की घोषणा पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
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