देश की खबरें | हमलावरों के प्रति कोई दुर्भावना नहीं: प्रोफेसर जोसेफ

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रोफेसर टी जे जोसेफ का दाहिना हाथ 2010 में प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के कथित कार्यकर्ताओं द्वारा काट दिया गया था लेकिन वह अपने हमलावरों के प्रति कोई दुर्भावना नहीं रखते, जिनके कृत्यों के चलते उनकी हथेली अब सही तरीके से काम नहीं कर पाती। प्रोफेसर को कुछ समय के लिए अपनी नौकरी भी गंवानी पड़ी जिसके परिणामस्वरूप उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली।

कोच्चि, 12 जुलाई प्रोफेसर टी जे जोसेफ का दाहिना हाथ 2010 में प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के कथित कार्यकर्ताओं द्वारा काट दिया गया था लेकिन वह अपने हमलावरों के प्रति कोई दुर्भावना नहीं रखते, जिनके कृत्यों के चलते उनकी हथेली अब सही तरीके से काम नहीं कर पाती। प्रोफेसर को कुछ समय के लिए अपनी नौकरी भी गंवानी पड़ी जिसके परिणामस्वरूप उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली।

जोसेफ का दृढ़ विश्वास है कि 13 साल पहले जो हुआ उससे उनका जीवन बर्बाद नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि इसमें कुछ बदलाव हुए और उन्हें कुछ नुकसान हुआ।

एक विशेष एनआईए अदालत द्वारा बुधवार को छह व्यक्तियों को दोषी ठहराए जाने के बाद जोसेफ ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘किसी भी लड़ाई में क्षति अपरिहार्य है। मेरे जैसे विजयी लोगों के लिए भी लेकिन मैं लड़ता रहूंगा।’’ अदालत ने जिन व्यक्तियों को दोषी ठहराया है वे पीएफआई के कथित सदस्य हैं। अदालत ने पांच अन्य को बरी कर दिया।

मामले में मुकदमे के पहले चरण में, 13 व्यक्तियों को कठोर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) से लेकर विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत विभिन्न अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था।

जोसेफ ने कहा कि फैसले से उन पर कोई प्रभाव नहीं हुआ क्योंकि उन्होंने कभी नहीं माना कि किसी आरोपी को सजा देने का मतलब पीड़ित को न्याय मिलना है।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे हिसाब से इसका मतलब केवल यह है कि देश का कानून लागू किया गया है। इसलिए, वास्तव में, चाहे उन्हें दोषी ठहराया जाए या बरी किया जाए, मुझे व्यक्तिगत रूप से इसकी कोई परवाह नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि मामले में जो लोग पकड़े गए और दोषी ठहराए गए, वे ‘‘केवल जरिया थे’’ और हमले की साजिश रचने वाले असली अपराधी अब भी बाहर हैं। जोसेफ ने कहा, "उनके खिलाफ है कि मेरी लड़ाई जारी है।’’

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें अपनी जान को लेकर भय है, क्योंकि मामले का मुख्य आरोपी - सावद - जिसने उनका हाथ काटा था - अब भी फरार है, जोसेफ ने कहा कि उन्हें भय नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं डरा हुआ नहीं हूं। मैंने अपना जीवन अपनी शर्तों पर जिया और भविष्य में भी ऐसा करता रहूंगा। यदि कोई आरोपी पकड़ा नहीं गया है, तो यह केवल व्यवस्था की विफलता को इंगित करता है।’’

इडुक्की जिले के तोडुपुझा में न्यूमैन कॉलेज के प्रोफेसर टी. जे. जोसेफ के दाहिने हाथ को चार जुलाई 2010 को वर्तमान में प्रतिबंधित चल रहे इस्लामिक संगठन पीएफआई के कथित सदस्यों द्वारा काट दिया गया था।

यह हमला उस वक्त किया गया था जब वह (प्रोफेसर) अपने परिवार के साथ एर्नाकुलम जिले के मूवाट्टुपुझा स्थित एक गिरजाघर से रविवार की प्रार्थना के बाद घर लौट रहे थे।

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