जरुरी जानकारी | नीति आयोग इंजीनियरिंग, चमड़ा, कपड़ा उद्योगों से जुड़े कर मुद्दों पर कर रहा गौर

नयी दिल्ली, सात अगस्त नीति आयोग इंजीनियरिंग, चमड़ा और कपड़ा क्षेत्रों में तैयार माल के मुकाबले कच्चे माल पर कम शुल्क लगाने समेत कर से जुड़े मुद्दों पर गौर कर रहा है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों की वृद्धि को बढ़ावा देने के लिये मामले के समाधन को लेकर इसे उच्च प्राधिकरणों के समक्ष रखा जा सकता है।

चमड़ा और इंजीनियरिंग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्होंने नीति आयोग के साथ जीएसटी (माल एवं सेवा कर) और उलट शुल्क ढांचे यानी कच्चे माल के मुकाबले तैयार उत्पादों पर अधिक शुल्क लगाने से संबंधित मुद्दों की एक सूची साझा की है।

उद्योग के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि सरकार उन मुद्दों को हल करेगी क्योंकि इससे देश से विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।’’

चमड़ा क्षेत्र ने वेट ब्ल्यू (नमी वाला क्रोम-टैन्ड चमड़ा), क्रस्ट (वैसा चमड़ा जिसे टैनिंग के बाद सुखाया जाता है लेकिन रंगा नहीं गया है) और तैयार चमड़े के आयात पर बुनियादी सीमा शुल्क की बहाली की सिफारिश की है।

यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि ये तीनों क्षेत्र श्रम प्रधान हैं और देश के वस्तु निर्यात में इनका महत्वपूर्ण योगदान है।

चमड़ा और जूता उद्योग में 44.2 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। वित्त वर्ष 2022-23 में इसका निर्यात 5.26 अरब डॉलर था।

पिछले वित्त वर्ष में इंजीनियरिंग निर्यात कुल मिलाकर 107 अरब डॉलर था, जबकि कपड़ा क्षेत्र का निर्यात उस दौरान लगभग 36 अरब डॉलर था।

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