देश की खबरें | गाजीपुर लैंडफिल अग्निकांड मामले में एनजीटी ने सीपीसीबी, एमसीडी और अन्य से जवाब मांगा

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नयी दिल्ली, पांच मई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पिछले महीने गाजीपुर लैंडफिल स्थल (कचरा एकत्रित करने की जगह) पर आग लगने की घटना पर केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों से पांच सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

अधिकरण 21 अप्रैल को पूर्वी दिल्ली में गाजीपुर लैंडफिल स्थल पर भीषण आग लगने की घटना के संबंध में एक अखबार की रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेकर मामले की सुनवाई कर रहा था।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने कहा कि समाचार रिपोर्ट ने पर्यावरण मानदंडों के अनुपालन से संबंधित एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है।

पीठ ने कहा कि 2022 में इस स्थल पर इसी तरह की आग लगी थी और अधिकरण ने अगले साल जनवरी में उपचारात्मक उपाय करने के निर्देश जारी करने के अलावा, दिल्ली सरकार पर 900 करोड़ रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया था।

पीठ ने पिछले साल कहा था कि दिल्ली सरकार और उसके प्राधिकारियों ने आग रोकने के लिए न्यूनतम मानकों का भी पालन नहीं किया है।

उन्नतीस अप्रैल को पारित हुए एक आदेश में अधिकरण ने कहा, "उपरोक्त आदेश के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है और लैंडफिल स्थलों पर ऐसी आग लगने की घटनाएं अब भी हो रही हैं।"

पीठ ने इस मामले में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के सदस्य, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के आयुक्त और पूर्वी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट को प्रतिवादी के रूप में पक्षकार बनाया है।

अधिकरण ने कहा, "मामले से जुड़े मुद्दे को ध्यान में रखते हुए हम सभी प्रतिवादियों को पांच सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट या जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हैं।"

अधिकरण ने डीपीसीसी के वकील की इस दलील पर गौर किया कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम में संशोधन के कारण समिति के पास पर्यावरणीय जुर्माना लगाने की शक्ति नहीं है।

इसमें कहा गया है, ‘‘सीपीसीबी को इसके लिए जिम्मेदार व्यक्तियों या प्राधिकारी पर लगातार उल्लंघन पर पर्यावरणीय जुर्माना लगाने के मुद्दे की जांच करने और पांच सप्ताह के भीतर न्यायाधिकरण के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया जाना चाहिए।’’

मामले की अगली सुनवाई छह अगस्त को होगी।

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