देश की खबरें | पर्यावरण सरंक्षण के लिए विभागों के मिलकर काम करने को सुनिश्चित करने वाला प्रमुख प्राधिकरण है एनजीटी : न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) एक 'प्रमुख प्राधिकरण' है, जिसका गठन यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया कि संबंधित अधिनियमों के तहत आने वाले विभाग पर्यावरण की सुरक्षा और हितों के लिए मिलकर काम करें।

नयी दिल्ली, सात सितंबर उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) एक 'प्रमुख प्राधिकरण' है, जिसका गठन यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया कि संबंधित अधिनियमों के तहत आने वाले विभाग पर्यावरण की सुरक्षा और हितों के लिए मिलकर काम करें।

एनजीटी के पास किसी मामले का स्वत: संज्ञान लेने की शक्ति है या नहीं? इस मुद्दे पर विचार कर रहे उच्चतम न्यायालय ने कहा कि यदि जरूरत होने पर विभाग निर्देश जारी करने में विफल रहते हैं तो अधिकरण तत्काल कदम उठा सकता है और उन्हें अपनी शक्ति का प्रयोग करने और उपचारात्मक एवं सुधारात्मक कदम उठाने संबंधी निर्देश दे सकता है।

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय और न्यायमूर्ति सी टी रविकुमार की पीठ ने कहा कि एनजीटी संबंधित अधिनियमों के तहत विभागों का काम नियंत्रित नहीं कर सकता, हालांकि यह उन्हें कानून के अनुसार काम करने के लिए बाध्य कर सकता है।

पीठ ने कहा कि अधिनियमों के कार्यान्वयन के लिए संबंधित कानूनों के तहत विभाग पहले से ही मौजूद हैं।

पीठ ने कहा, '' लेकिन, यह एक 'प्रमुख प्राधिकरण' है, जिसका गठन यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया कि संबंधित अधिनियमों के तहत आने वाले विभाग पर्यावरण की सुरक्षा और हितों के लिए मिलकर काम करें।''

एक आवेदक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने पीठ से कहा कि अंततः पर्यावरण की रक्षा करनी होगी क्योंकि ये ऐसे मामले हैं जहां आम तौर पर लोग प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा करना राज्य का कर्तव्य है और अधिकरण पर्यावरण क्षरण से संबंधित मुद्दों को हल करने के अधिकार से वंचित नहीं कर सकता।

पीठ ने कहा, ''जब आप अधिकार और शक्ति की बात कहते हैं, तो यह अधिकरण का कर्तव्य भी है।''

केंद्र ने दो सितंबर को उच्चतम न्यायालय से कहा था कि एनजीटी के पास मामले का स्वत: संज्ञान लेने का अधिकार नहीं है, क्योंकि यह कानून में नहीं है।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पीठ से कहा था कि प्रक्रियात्मक पहलू उस ‘‘विशिष्ट’’ अधिकरण की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र को बांध नहीं सकते, जिसका गठन पर्यावरणीय मामलों से निपटने के लिए किया गया है।

मंत्रालय की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने दो सितंबर को शीर्ष अदालत से कहा था, ‘‘हमारा अभिवेदन यह है कि स्वत: संज्ञान की शक्ति उसके पास नहीं है। हालांकि, यह कहना कि किसी पत्र , किसी अर्जी इत्यादि पर सुनवाई नहीं हो सकती, इस बात को बहुत अधिक खींचना होगा।’’

इस मामले में सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।

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