देश की खबरें | एनजीओ ने सुधार गृह में रहने वाले बच्चों के संबंध में बालअधिकार आयोग से निर्देश वापस लेने को कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मानवाधिकार गैर सरकारी संगठनों ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से अनुरोध किया है कि वह आठ राज्यों के बाल सुधार गृहों में रह रहे बच्चों को उनके परिवार के पास भेजने के अपने निर्देश को वापस ले क्योंकि यह ‘किशोर न्याय कानून’ के उद्देश्यों के विरूद्ध है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, सात अक्टूबर मानवाधिकार गैर सरकारी संगठनों ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग से अनुरोध किया है कि वह आठ राज्यों के बाल सुधार गृहों में रह रहे बच्चों को उनके परिवार के पास भेजने के अपने निर्देश को वापस ले क्योंकि यह ‘किशोर न्याय कानून’ के उद्देश्यों के विरूद्ध है।

बाल अधिकार आयोग (एनसीपीसीआर) ने आठ राज्यों को निर्देश दिया है कि वह अपने यहां बाल सुधार गृहों में रहने वाले बच्चों की उनके परिवार के पास वापसी सुनिश्चित करें क्योंकि पारिवारिक वातावरण में परवरिश पाना प्रत्येक बच्चे का अधिकार है।

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गौरतलब है कि इन आठ राज्यों के बाल सुधार गृहों में देश के करीब 70 प्रतिशत बच्चे रहते हैं।

आयोग ने कहा कि इन बाल सुधार गृहों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा और रक्षा को लेकर चिंताजनक हालात के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है।

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आयोग के एक खुले पत्र में ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ इंडिविजुअल्स और नेशनल एंड स्टेट ह्यूमन राइट्स इंस्टीट्यूशन (एआईएमएमआई) के साथ काम करने वाले एनजीओ, एनफोल्ड प्रोएक्टिव हेल्थ ट्रस्ट, एचएक्यू :सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स एंड पीपुल्स वाच ने दावा किया कि आयोग की सिफारिशें परिवारों को तैयार करने, वैकल्पिक देखभाल के कदम उठाने और प्रणालीगत असफलता के बड़े मुद्दों को नजरअंदाज करती हैं।

पत्र में कहा गया है, ‘‘एनसीपीसीआर की सिफारिशें किशोर न्याय (बच्चों के देखभाल और संरक्षा) कानून, 2015 के उद्देश्य, सिद्धांत और विचार के विरूद्ध है।’’

खुले पत्र में गैर सरकारी संगठनों ने कहा है कि वे एनसीपीसीआर की सिफारिशों की कड़ी आलोचना करते हैं और उसे तुरंत वापस लेने की मांग करते हैं।

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