नयी दिल्ली, 26 फरवरी दवा कंपनी एनजीएल फाइन-केम और उसके प्रवर्तकों ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ शेयरधारिता के खुलासे के उल्लंघन के कथित मामले का निपटान कर लिया है। इसके लिए उन्होंने 92.21 लाख रुपये का भुगतान किया है।
इस मामले का निपटारा एनजीएल फाइन-केम के साथ-साथ पीसीआई फेरमोन केमिकल्स, राजेश लवांडे और राहुल नचाने ने किया। कुल भुगतान में से एनजीएल फाइन-केम ने 54.42 लाख रुपये का भुगतान किया, जबकि अन्य तीन ने 12.6 लाख रुपये दिए।
यह समझौता इकाइयों द्वारा भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से उसके निपटान नियमों के तहत कथित उल्लंघनों को हल करने का अनुरोध करने के बाद किया गया।
समझौते को स्वीकार करते हुए बाजार नियामक ने मंगलवार को अपने आदेश में कहा, ‘‘ समझौते की शर्तों को स्वीकार करने, सेबी द्वारा राशि प्राप्त करने के मद्देनजर... आवेदकों के खिलाफ 29 दिसंबर, 2023 के कारण बताओ नोटिस के जरिये शुरू की गई तत्काल न्यायिक कार्यवाही को निपटान विनियमों के अनुसार निपटाया जाता है।’’
यह मामला शेयरधारिता की स्थिति के गलत खुलासे से संबंधित मुद्दे से सामने आया था।
एनजीएल फाइन-केम ने जुलाई, 2022 में न्यासी को को शेयर हस्तांतरित करने के बाद खुली पेशकश की आवश्यकता से छूट मांगी थी जिसके बाद सेबी ने इसकी जांच शुरू की थी। बाद में छूट आवेदन वापस ले लिया गया, लेकिन सेबी ने मार्च, 2002 से जून, 2019 की अवधि के लिए खुलासा खामियों की जांच की।
जांच से पता चला कि एनजीएल फाइन-केम ने दिसंबर, 2002 से जून, 2019 तक की तिमाहियों के लिए पीसीआई फेरमोन केमिकल्स को ‘‘ प्रवर्तक और प्रवर्तक समूह’’ के बजाय ‘‘ सार्वजनिक / गैर-प्रवर्तक’’ के रूप में गलत तरीके से प्रकट किया।
इसके अतिरिक्त, यह आरोप लगाया गया कि एनजीएल फाइन-केम ने कंपनी में पीसीआई फेरमोन केमिकल्स की शेयरधारिता के संबंध में 31 तिमाहियों में गलत खुलासा किया। साथ ही, प्रवर्तक राजेश और राहुल ने 2011-2019 के अपने अधिग्रहण खुलासे में पीसीआई फेरमोन की शेयरधारिता का जिक्र नहीं किया।
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