नयी दिल्ली, 20 नवंबर सरकार ने बेसहारा बच्चों की देखभाल और संरक्षण के लिए नयी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाई है।
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने गैर सरकारी संगठन ‘सेव द चिल्ड्रेन’ के साथ मिलकर बेसहारा बच्चों: स्ट्रीट चिल्ड्रेन: को लेकर नयी एसओपी बनाई है।
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इस एसओपी का मकसद इन बेसहारा बच्चों की मदद करने और उन्हें उनके परिवार के पास पहुंचाने के लिए प्रक्रियाओं को मजबूत बनाना है।
‘सेव द चिल्ड्रेन’ ने दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के 10 शहरों में करीब दो लाख ऐसे बच्चों की पहचान की है जिनके संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, शौचालय सुविधा और शहरी विकास एवं कल्याण से संबंधित अधिकारों के मुद्दों का अब तक समाधान हुआ है।
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एनसीपीसीआर का कहना है कि एसओपी का मुख्य सिद्धांत यह है कि बच्चे की उसके परिवार के साथ ही देखभाल हो क्योंकि परिवार ही बच्चें का पहला सहारा होता है।
आयोग के अध्यक्ष प्रियंका कानूनगो ने कहा कि इस एसओपी के माध्यम से सड़क पर रहने वाले बच्चों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों और उनके परिवारों को मबजूत बनाने का प्रयास किया गया है।
उनके मुताबिक, एसओपी में बच्चों को परिवार के साथ या परिवार के बिना सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
हक
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