देश की खबरें | एनईएसओ प्रतिनिधिमंडल मणिपुर के तीन दिवसीय दौरे पर, समुदाय के नेताओं से मुलाकात करेगा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पूर्वोत्तर छात्र संगठन (एनईएसओ) का एक प्रतिनिधिमंडल तीन दिवसीय दौरे के लिए मणिपुर पहुंचा और इस दौरान वह जातीय संघर्ष के पीड़ितों से मिलने के लिए राहत शिविर जाएगा।

इंफाल, दो अगस्त पूर्वोत्तर छात्र संगठन (एनईएसओ) का एक प्रतिनिधिमंडल तीन दिवसीय दौरे के लिए मणिपुर पहुंचा और इस दौरान वह जातीय संघर्ष के पीड़ितों से मिलने के लिए राहत शिविर जाएगा।

मणिपुर में 19 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष सैमुअल बी जिरवा, महासचिव मुत्सिख्यो योबो और मुख्य सलाहकार समुज्जल कुमार भट्टाचार्य कर रहे हैं।

राज्य में अपने प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल अनुसुइया उइके और मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह से भी संभवत: मुलाकात करेगा।

एनईएसओ के सदस्य संघों में से एक अखिल असम छात्र संघ (एएएसयू) के अध्यक्ष उत्पल शर्मा ने कहा, ‘‘हम यहां शांति और सद्भावना का संदेश लेकर आए हैं। अपनी यात्रा के जरिए हम सभी लोगों से मणिपुर में शांति लाने और सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील करना चाहते हैं।’’

उन्होंने बताया कि एनईएसओ के घटक अखिल मणिपुर छात्र संघ (एएमएसयू) मेइती और नागा छात्र संघ (एनएसएफ) कुकी समुदायों के संपर्क में हैं।

गुवाहाटी से इंफाल पहुंचने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने बिष्णुपुर और इंफाल पूर्वी जिलों में तीन राहत शिविरों का दौरा किया और वहां शरण ले रहे मेइती समुदाय के लोगों से मुलाकात की।

शर्मा ने कहा, ‘‘हम चुराचांदपुर जाएंगे और वहां राहत शिविरों का दौरा करेंगे और कुकी पीड़ितों से मिलेंगे। हम दोनों समुदायों के विभिन्न नागरिक समाज समूहों के साथ भी चर्चा करेंगे और जातीय संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए आगे के रास्ते पर बातचीत करेंगे।’’

उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार शाम को राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा है।

भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘इन जातीय संघर्षों में दोनों पक्षों को मिले घाव बहुत गहरे हैं। दोनों समुदायों के बीच अविश्वास को दूर करने के लिए विशेष कदम उठाने और विश्वास-निर्माण उपायों की आवश्यकता होगी।’’

मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद राज्य में भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

राज्य में मेइती समुदाय की आबादी करीब 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं। वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और वे अधिकतर पर्वतीय जिलों में रहते हैं।

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