खेल की खबरें | नीरज ने अपने नाम की प्रतियोगिता आयोजित करने का सपना साकार कर एक और उपलब्धि हासिल की
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...फिलेम दीपक सिंह...
बेंगलुरु, पांच जुलाई नीरज चोपड़ा ने शनिवार को अपने शानदार करियर में एक और उपलब्धि हासिल की जब वह किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में मेजबान के रूप में भाग लेने वाले पहले भारतीय बन गए। उन्होंने यहां कांतीरवा स्टेडियम में जोश से भरे माहौल में अपना दबदबा बनाया।
हरियाणा के पानीपत के खंडरा गांव के 27 वर्षीय चोपड़ा ने अपने खेल का हर सम्मान हासिल किया है। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों की नजरें उन पर ही टिकी थी।
यह खेल और प्रशंसकों को उन्हें और अन्य शीर्ष अंतरराष्ट्रीय सितारों को अपनी आंखों के सामने प्रतिस्पर्धा करते देखने का अनुभव देने का उनका तरीका है।
चोपड़ा ने स्वीडन के पोल वॉल्टर अर्मांडो डुप्लांटिस और कीनिया के लंबी दूरी के धावक किपचोगे कीनो से प्रेरणा ली है जिनके नाम पर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट मोंडो क्लासिक और किप कीनो क्लासिक होते हैं ।
बादल छाए रहने, ठंडी हवा चलने और 24 डिग्री सेल्सियस के तापमान के बीच कांतीरवा स्टेडियम पूरी तरह से भरा तो नहीं था, लेकिन चोपड़ा के प्रति समर्थन जताने वाले दर्शकों के शोर से स्टेडियम गूंज रहा था।
परिवार के सदस्यों और दोस्तों की मौजूदगी में चोपड़ा को 12 खिलाड़ियों की प्रतियोगिता में प्रशंसकों ने उनके सभी थ्रो के लिए प्रोत्साहित किया।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी वीवीआईपी क्षेत्र में प्रतियोगिता देखने के लिए मौजूद थे। इस मौके पर चोपडा के परिवार के करीबी सदस्य भी मौजूद थे।
दोहरे ओलंपिक पदक विजेता और मौजूदा विश्व चैंपियन चोपड़ा ने प्रतियोगिता से पहले अपने कोच और चेक गणराज्य के महान भाला फेंक खिलाड़ी रहे जान जेलेजनी (98.48 मीटर के विश्व रिकॉर्ड धारक) को सम्मानित करने के लिए पहली बार बाहर आकर उन्होंने प्रशंसकों का अभिवादन किया।
ढांडा न्योलीवाला ने खुले मैदान में हरियाणा हिप-हॉप के प्रदर्शन से दर्शकों का मनोरंजन किया।
प्रतियोगिता के लिए मैदान पर चोपड़ा के आने पर प्रशंसकों का शोर चरम पर पहुंच गया। दर्शक उनके हर थो से पहले और बाद में हौसला अफजाई कर रहे थे।
एनसी क्लासिक पहले 24 मई को हरियाणा के पंचकूला में होना था लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रसारकों की जरूरत के अनुसार लाइट की व्यवस्था नहीं होने से इसे बेंगलुरु में कराया जा रहा है ।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था ।
यह भारत में किसी एक खेल की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स स्पर्धा है जिसे विश्व एथलेटिक्स ने ए कैटेगरी का दर्जा दिया है । इस प्रतियोगिता को चोपड़ा का ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ माना जाता है और इसका उद्देश्य भारत को शीर्ष स्तर के एथलेटिक्स कार्यक्रमों के विश्वसनीय मेजबान के रूप में स्थापित करना है।
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