देश की खबरें | मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत : न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि 126 साल पुराने मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है और बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 के तहत राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) द्वारा आवश्यक कदम उठाने के लिए निगरानी समिति को मजबूत बनाया जाएगा।
नयी दिल्ली, सात अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि 126 साल पुराने मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है और बांध सुरक्षा अधिनियम 2021 के तहत राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) द्वारा आवश्यक कदम उठाने के लिए निगरानी समिति को मजबूत बनाया जाएगा।
न्यायालय ने केरल और तमिलनाडु दोनों राज्यों को इतिहास में नहीं जाने और बांध के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि निगरानी समिति निर्देश जारी करेगी जिसका अनुपालन दोनों राज्यों द्वारा किया जाएगा।
न्यायालय ने दोनों राज्यों से "पानी को सुरक्षित रूप से बहने" देने की अपील की और कहा कि वह शुक्रवार को इस मामले में आदेश पारित करेगा।
न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ मुल्लापेरियार बांध से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। यह बांध 1895 में केरल के इडुक्की जिले में पेरियार नदी पर बनाया गया था।
सर्वोच्च अदालत ने पांच अप्रैल को कहा था कि एनडीएसए की स्थापना तक निगरानी समिति को सभी वैधानिक कार्य करने के लिए कहा जा सकता है।
पीठ ने बृहस्पतिवार को कहा, "आज, मौजूदा बांध की सुरक्षा पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है, इसके लिए कानून के तहत एक प्राधिकरण है लेकिन यह स्थापित नहीं है।"
केरल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने कहा कि सैद्धांतिक रूप से उन्हें न्यायालय के इस सुझाव से कोई कठिनाई नहीं है कि निगरानी समिति एक समय-सीमा के तहत राष्ट्रीय प्राधिकरण का कार्य कर सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य ने कुछ प्रस्ताव तैयार किए हैं।
केरल के वकील ने कहा कि राज्य का सुझाव है कि निगरानी समिति के अध्यक्ष को बदला जाना चाहिए और इस पद पर किसी वरिष्ठ अधिकारी को नियुक्त किया जाना चाहिए।
तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफड़े ने कहा कि उन्हें उन उपायों को लागू करने से रोका जा रहा है जिनके लिए सर्वोच्च अदालत ने 2006 और 2014 के अपने फैसलों में अनुमति दी थी।
पीठ ने कहा कि निगरानी समिति को मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
जब नफड़े ने केरल के "अवरोधक रवैये" के बारे में दलील दी तो गुप्ता ने कहा कि अगर तमिलनाडु इस पर बहस करना चाहता है तो उन्हें पूरे मामले को रखना होगा।
इस पर पीठ ने कहा कि कानून के बाद अब बहस करने के लिए क्या है और ‘‘हम इन आरोपों और प्रति-आरोपों पर गौर नहीं कर रहे हैं।"
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)