(नीलाभ श्रीवास्तव)
नयी दिल्ली, 10 जुलाई राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने यात्री केबल कार और रोपवे प्रणालियों में संभावित सुरक्षा खामियों का पता लगाने और एक ढांचागत खाका तैयार करने के लिए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण शुरू किया है, जो दुर्घटना या आपात स्थिति में प्रभावी बचाव अभियान शुरू करने में मदद करेगा।
इस केंद्रीय बल ने अपने दल को विशिष्ट रोपवे बचाव कौशल में प्रशिक्षित करने का भी निर्णय लिया है। इसके अलावा पुली और कारबाइनर जैसे उपकरणों की खरीद का भी फैसला किया गया है जिसका इस्तेमाल बचावकर्ता हवा में लटकी कार में फंसे लोगों को निकालने में करेंगे।
यह कदम इस साल झारखंड, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश में हुई कम से कम तीन रोपवे दुर्घटनाओं की पृष्ठभूमि में उठाया गया है। इस साल अप्रैल में झारखंड के देवघर जिले के त्रिकूट पहाड़ियों पर रोपवे की केबिल कार के हवा में फंसने पर भारतीय वायु सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और स्थानीय प्रशासन द्वारा 40 घंटे का लंबा बचाव अभियान चलाया गया, लेकिन तीन लोगों की मौत हो गई। हालांकि, 12 लोगों को बचाया भी गया।
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के परवानू टिम्बर ट्रेल में जून में एक केबल कार में 11 लोग घंटों तक फंसे रहे और एनडीआरएफ तथा अन्य एजेंसियों ने छह घंटे के लंबे अभियान के बाद उन्हें बचाया।
इसी तरह मई में मध्य प्रदेश में सतना जिले के मैहर में पहाड़ी की चोटी पर स्थित देवी 'शारदा' के दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों को केबल कार में फंसने के लगभग एक घंटे बाद बचाया गया।
हाल में उत्तराखंड में मसूरी के पास प्रसिद्ध सुरकंडा देवी मंदिर को जोड़ने वाले एक रोपवे में तकनीकी खराबी के कारण भाजपा विधायक किशोर उपाध्याय समेत 40 लोग करीब एक घंटे तक रविवार को हवा में फंसे रहे।
उपाध्याय ने कहा कि मंदिर के लिए रोपवे का संचालन फिर से शुरू कर दिया गया है, लेकिन सुझाव दिया कि इसकी ठीक से जांच की जानी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं की जान को खतरा न हो।
एनडीआरएफ के महानिदेशक (डीजी) अतुल करवाल ने पीटीआई- से कहा, ‘‘हमने देश में सभी यात्री रोपवे और केबल कार प्रणालियों के संचालन को समझने और उपचारात्मक कार्रवाई का सुझाव देने के लिए एक सर्वेक्षण शुरू किया है। भारत में 50 से अधिक ऐसी प्रणालियां हैं, जो तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और यात्रियों के परिवहन के लिए उपयोग की जाती हैं।’’
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