विदेश की खबरें | प्रकृति विश्व का असली औषधालय है

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. मिशिगन (अमेरिका), 28 जुलाई (द कन्वरसेशन) मानव के विकास में हजारों बरस का समय लगा है , जबकि आधुनिक औषधि का अविष्कार जैसा कि हमें पता है कि 19वीं और 20वीं सदी में हुआ है। तो फिर सवाल उठता है कि इंसान इतने हजारों साल तक बिना आधुनिक दवाइयों और इलाज के, बीमारियों से कैसे बचा रहा।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

मिशिगन (अमेरिका), 28 जुलाई (द कन्वरसेशन) मानव के विकास में हजारों बरस का समय लगा है , जबकि आधुनिक औषधि का अविष्कार जैसा कि हमें पता है कि 19वीं और 20वीं सदी में हुआ है। तो फिर सवाल उठता है कि इंसान इतने हजारों साल तक बिना आधुनिक दवाइयों और इलाज के, बीमारियों से कैसे बचा रहा।

यह सवाल मेरे ज़हन में तब आया जब कोविड-19 महामारी ने अप्रैल 2020 में भारत में मेरे परिवार को अपनी चपेट में लिया। उस वक्त इसका इलाज सीमित था। मैं एक जैव चिकित्सा वैज्ञानिक हूं और इतने साल से इस क्षेत्र में काम कर रहा हूं। इसमें किसी भी उपचार का इस्तेमाल करने से पहले ठोस साक्ष्य और आधिकारिक तौर पर सुरक्षा जांच की जरूरत पड़ती है और महामारी के दौरान इसकी ज्यादा अहमियत नहीं रही, क्योंकि मैं किसी भी स्रोत से संभावित इलाज की तलाश कर रहा था जो चाहे वैज्ञानिक दस्तावेज़ से मिले या जनकथा के विज्ञान से।

मैं कोई भी प्रायोगिक या पारंपरिक दवा का इस्तेमाल करने के लिए राज़ी था जो मेरे पिता की मदद कर सके।

खैर, मेरे पिता, संक्रमण मुक्त हुए। मैं पक्के तौर पर यह नहीं कह सकता हूं कि हमने जिन पारंपरिक दवाइयों का इस्तेमाल किया था, उन्होंने वास्तव में उन्हें संक्रमण से उभरने में मदद की थी। चूंकि मेरा पूरा करियर ही प्रकृति में पाए जाने वाले रसायन अवयवों (कम्पाउंड) से नई दवाइयों की खोज करने पर केंद्रित रहा है तो , मैंने सोचा कि क्या हमारे द्वारा उपयोग की जाने वाली पारंपरिक दवाओं में एक ऐसा अणु था जिसे अलग किया जा सकता था और कोविड-19 के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था।

मेरे जैसे वैज्ञानिक, अवयव को प्रयोगशाला में संश्लेषित करने के बजाय प्रकृति में मौजूदा अवयवों को शुद्ध करके विभिन्न बीमारियों के लिए नई औषधियों को खोजते हैं।

कोविड-19 से लेकर एंटीबायोटिक प्रतिरोध तक, मेरा मानना है कि पिछली सफलताएं और नई प्रौद्योगिकियां प्राकृतिक उत्पादों से नई दवाओं को विकसित करने की जबरदस्त क्षमता की ओर इशारा करती हैं।

प्राकृतिक उत्पादों का लाभ

मानव ने वक्त के साथ प्रकृति के संग बेहतरीन तालमेल बैठा लिया है। डीएनए विश्लेषण से पता चला है कि प्रारंभिक मानव ने दंत संबंधी समस्या का इलाज चिनार और पेनिसिलियम मोल्ड से किया होगा। चिनार में एस्पिरिन का सक्रिय अवयव और पेनिसिलियम मोल्ड में एंटीबायोटिक पेनिसिलिन होता है।

शोधकर्ता चिनार और पेनिसिलियम के जैविक प्रभाव देने वाले अणुओं को प्राकृतिक उत्पाद कहते हैं क्योंकि वे सूक्ष्म जीवों, कवक, मूंगा और पौधों जैसे जीवित जीवों से हासिल किए जाते हैं। ये प्राकृतिक उत्पाद विशेष जैविक कार्यों को पूरा करने के लिए संरचनात्मक रूप से इस्तेमाल होने के लिए विकसित हुए हैं।

प्राकृतिक उत्पादों को जीवित प्राणियों में कार्य करने के लिए बनाया गया है और इसलिए यह दवा की खोज करने के लिए स्रोत के तौर पर अपनी ओर आकर्षित करते हैं। विभिन्न जीवों में प्रोटीन भिन्न दिख सकते हैं जबकि कई अन्य में समान संरचनात्मक विशेषताएं होती हैं और वे विभिन्न प्रजातियों में एक जैसा काम करते हैं।

प्राकृतिक उत्पाद जीवाणु और पेड़-पौधों से निकलते हैं और आधुनिक औषधि की खोज के लिए सबसे बड़े साधन हैं। 1940 में पेनिसिलियम मोल्ड से एंटीबॉयोटिक पेनिसिलिन की खोज हुई है जिससे डॉक्टर कई घातक संक्रमणों का इलाज कर सके।

सितंबर 2019 तक, वर्तमान में उपलब्ध दवा नियामक एफडीए की ओर से स्वीकृत 50 फीसदी से ज्यादा दवाइयां सीधे या परोक्ष रूप से प्राकृतिक उत्पादों से बनी हैं। कोलेस्ट्रॉल रोधी दवा एटोरवास्टेटिन (लिपिटर) दो दशक से सबसे ज्यादा बिकती है और यह कवक पेनिसिलियम सिट्रिनम द्वारा निर्मित अवयव से बनाई गई है।

इसके अलावा भी कई प्रतिष्ठित दवाएं प्राकृतिक उत्पादों से बनाई गई हैं जिसमें कवक रोधी एम्फोटेरिसिन बी दवा भी शामिल है। शोधार्थी भांग और भांग के अन्य अवयवों से कोविड-19 का इलाज करने के रास्तों पर शोध कर रहे हैं। हालांकि एफडीए ने अभी इस तरह की किसी भी दवाई को स्वीकृत नहीं किया है।

दूसरी ओर फार्मास्युटिकल कंपनियों ने प्राकृतिक उत्पाद-आधारित दवा खोज कार्यक्रमों को कम कर दिया है, और सीमित लाभ के कारण संघीय वित्त पोषण भी कम है।

नई दवाएं अक्सर कोविड-19 जैसी अभूतपूर्व स्वास्थ्य आपात स्थितियों के लिए आवश्यक होती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की सितंबर 2017 की एक रिपोर्ट ने पुष्टि की कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध एक वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल है जो आधुनिक चिकित्सा में प्रगति को गंभीर रूप से खतरे में डाल देगा। यदि वर्तमान एंटीबायोटिक्स अपनी प्रभावशीलता खो देते हैं, तो सामान्य उपचार जैसे कि सिजेरियन सेक्शन और कैंसर का इलाज अविश्वसनीय रूप से जोखिम भरा हो सकता है।

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