जरुरी जानकारी | मांग बढ़ने से सरसों तेल-तिलहन और सोयाबीन दाने में सुधार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. त्योहारी मांग के साथ-साथ सोयाबीन के तेल रहित खल (डीओसी) की स्थानीय मांग बढ़ने से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सोयाबीन तिलहन और सरसों तेल-तिलहन कीमतों में सुधार का रुख रहा, जबकि अन्य तेल-तिलहनों के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

नयी दिल्ली, 21 अगस्त त्योहारी मांग के साथ-साथ सोयाबीन के तेल रहित खल (डीओसी) की स्थानीय मांग बढ़ने से दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में शनिवार को सोयाबीन तिलहन और सरसों तेल-तिलहन कीमतों में सुधार का रुख रहा, जबकि अन्य तेल-तिलहनों के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

बाजार सूत्रों ने कहा कि बाजार में सोयाबीन की भारी किल्लत है। महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक जैसे उत्पादक राज्यों में सोयाबीन उपलब्ध नहीं है इसलिए इसके भाव ऊंचे हैं। वायदा कारोबार में सोयाबीन के लगभग एक महीने में आने वाली अगली फसल के लिए अक्टूबर डिलिवरी वाले अनुबंध का भाव 6,400 रुपये क्विन्टल है जो हाजिर भाव से 32-33 प्रतिशत कम यानी 30 रुपये प्रति किलो नीचे है। इस कमी का कारण सरकार द्वारा आयात शुल्क में की गई कमी से कहीं ज्यादा आगामी फसल है जिसका उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद की जा रही है और उसकी गुणवत्ता भी बेहतर होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि बहुत सीमित मात्रा में तेल मिलों के अलावा बड़े किसानों के पास सरसों का स्टॉक है जो कम मात्रा में मंडियों में अपना स्टॉक उतार रहे हैं। इसके अलावा त्योहारी मांग के कारण भी सरसों तेल-तिलहनों के भाव में सुधार का रुख है।

सूत्रों ने कहा कि सहकारी संस्था हाफेड और नाफेड को अभी से अगली बिजाई के दौरान छोटे किसानों की मदद के लिए सरसों बीज का स्टॉक जमा कर लेना चाहिये। तेल विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से मौजूदा सत्र में किसानों को सरसों के अच्छे दाम मिले हैं, उसे देखते हुए अगली बार सरसों की पैदावार लगभग दोगुनी हो सकती है। सरसों की मांग एक महीने में और बढ़ेगी और इसकी कमी को आयात से पूरा नहीं किया जा सकता क्योंकि सरसों का कोई विकल्प नहीं है।

सूत्रों का कहना है कहा कि सरकार को तेल-तिलहनों के आयात शुल्क में घटबढ़ करने के बजाय तेल-तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। उसी से सही मायने में देश आत्मनिर्भरता का रास्ता तय करेगा।

बाजार में थोक भाव इस प्रकार रहे- (भाव- रुपये प्रति क्विंटल)

सरसों तिलहन - 8,025 - 8,100 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये।

मूंगफली - 6,620 - 6,765 रुपये।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात)- 15,100 रुपये।

मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड तेल 2,330 - 2,460 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 16,580 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 2,560 -2,610 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 2,645 - 2,755 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 15,100 - 17,600 रुपये।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 15,100 रुपये।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 15,000 रुपये।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 13,650 रुपये।

सीपीओ एक्स-कांडला- 11,950 रुपये।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 14,500 रुपये।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 13,750 रुपये।

पामोलिन एक्स- कांडला- 12,600 (बिना जीएसटी के)

सोयाबीन दाना 9,300 - 9,400, सोयाबीन लूज 9,000 - 9,050 रुपये

मक्का खल (सरिस्का) 3,800 रुपये

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