देश की खबरें | आंध्र प्रदेश के इंजीनियर की हत्या: न्यायालय ने मौत की सजा पाए व्यक्ति को बरी किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने आंध्र प्रदेश के 23 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कथित हत्या से जुड़े मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से बताये गये पक्ष में “कई खामियां” देखते हुए मौत की सजा पाए एक व्यक्ति को मंगलवार को बरी कर दिया।
नयी दिल्ली, 28 जनवरी उच्चतम न्यायालय ने आंध्र प्रदेश के 23 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कथित हत्या से जुड़े मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से बताये गये पक्ष में “कई खामियां” देखते हुए मौत की सजा पाए एक व्यक्ति को मंगलवार को बरी कर दिया।
न्यायमूर्ति बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर चंद्रभान सुदाम सनप के खिलाफ दोषसिद्धि बरकरार रखना अत्यंत असुरक्षित होगा।
एक दशक से भी अधिक समय पहले, आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम की एक 23 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर क्रिसमस की छुट्टियों के बाद पांच जनवरी 2014 को मुंबई लौटी थी और मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर ट्रेन से उतरी थी, जहां उसे आखिरी बार जीवित देखा गया था।
मोबाइल फोन पर उससे संपर्क करने के कई बार असफल प्रयास के बाद, महिला के पिता ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
लगभग 10 दिनों तक चली गहन खोज के बाद, कांजुरमार्ग क्षेत्र में पूर्वी एक्सप्रेस हाईवे के पास झाड़ियों में एक जला हुआ शव सड़ी हालत में मिला।
मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने सनप को गिरफ्तार किया और उस पर बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया। उसके खिलाफ मुकदमा चला तथा उसे मौत की सजा सुनाई गई।
उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखने वाले बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को दरकिनार करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि जिन परिस्थितियों को एक साथ जोड़ा गया है, उनसे सनप के दोषी होने की एकमात्र परिकल्पना नहीं निकलती।
इसमें कहा गया है, “सभी तथ्य हमें इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बाध्य करते हैं कि अभियोजन पक्ष की कहानी में बहुत सी खामियां हैं, जिससे यह निष्कर्ष निकलता है कि इस मामले में जो दिख रहा है, उससे कहीं अधिक कुछ है।”
पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।
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