देश की खबरें | अधिकतर भारतीय सिकल सेल बीमारी से बचाव का खर्च वहन करने में असमर्थ : लांसेट कमीशन

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नयी दिल्ली, 12 जुलाई सिकल सेल बीमारी के खतरे को कम करने का खर्च वहन करने की क्षमता भारत और उप सहारा अफ्रीका के अधिकतर लोगों के पास नहीं है, जबकि इन्हीं स्थानों पर यह बीमारी ज्यादा व्याप्त है।

लांसेट हिमेटोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।

इस अध्ययन से ठीक पहले इसी जर्नल में एक और अध्ययन प्रकाशित किया गया था जिसमें कहा गया था कि सिकल सेल रोग (एससीडी) का सर्वाधिक बोझ पश्चिम तथा मध्य उप सहारा अफ्रीका तथा भारत में है।

इस अध्ययन के लेखकों ने यह भी कहा कि एसडीसी को लेकर स्वास्थ्य देखभाल तथा विशेषज्ञों की कमी है, साथ ही इन देशों में नए उपचार विकसित करने के लिए परीक्षण भी नहीं किए जा रहे हैं।

एससीडी लाल रक्त कणिकाओं का अनुवांशिक विकार है, जो हीमोग्लोबिन को प्रभावित करता है। इससे दुनियाभर में दो करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हैं।

इस हालिया अध्ययन में पता चला है कि 2021 में एससीडी से दुनिया भर में 3,76,000 लोगों की जान जाने की आशंका है, वहीं मौत के 34,400 मामलों में कारण स्पष्ट थे।

कमीशन के अध्यक्ष फ्रेडरिक पील ने कहा,‘‘दुनिया भर में सिकल सेल बीमारी से मौत के मामले बढ़ रहे हैं....।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ सिकल सेल बीमारी के खतरे को कम करने का खर्च वहन करने की क्षमता भारत और उप सहारा अफ्रीका के अधिकतर लोगों के पास नहीं है,जबकि इन्हीं स्थानों पर यह बीमारी अधिक व्याप्त है। सरकारों को इन्हें सीधे वित्त पोषित करने की आवश्यकता है।’’

कमीशन के अनुसार एससीडी का बोझ कम करने के लिए आंकड़े जुटाने, पहचान करने, उपचार और प्रशिक्षण में सुधार के वास्ते आर्थिक तथा राजनीतिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता है और इससे लाखों मरीजों के जीवन पर तथा उनके परिवारों पर अनुकूल असर पड़ेगा।

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