अहमदाबाद, चार मई गुजरात उच्च न्यायालय ने पिछले साल मोरबी कस्बे में ढहे पुल पर तैनात तीन सुरक्षा गार्ड की जमानत याचिका बृहस्पतिवार को मंजूर कर ली।
मोरबी में पिछले साल 30 अक्टूबर को ब्रिटिश कालीन पुल गिरने से 135 लोगों की मौत हो गई थी और 56 गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
न्यायमूर्ति समीर दवे ने याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए उनके वकील की इन दलीलों पर गौर किया कि सुरक्षा गार्ड केवल अपना काम कर रहे थे और निर्णय लेने की उस प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी, जिसके कारण त्रासदी हुई। इस पुल के परिचालन और मरम्मत की जिम्मेदारी ओरेवा समूह की थी।
उच्च न्यायालय ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद अल्पेश गोहिल (25), दिलीप गोहिल (33) और मुकेश चौहान (26) की जमानत याचिका मंजूर कर ली। ये तीनों दाहोद जिले के गरबाडा तालुका में तुनकी वजू गांव के निवासी हैं। ये इस मामले में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 10 आरोपियों में शामिल हैं।
तीनों आरोपियों के वकील एकांत आहूजा ने कहा कि उनके मुवक्किलों को ओरेवा समूह ने वास्तव में मजदूरों के रूप में काम पर रखा था, लेकिन उन्हें घटना वाले दिन पुल पर सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात किया गया था क्योंकि उस दिन उनका साप्ताहिक अवकाश था।
लोक अभियोजक मितेश अमीन ने जमानत याचिकाओं का विरोध नहीं किया और कहा, ‘‘मूल जिम्मेदारी ओरेवा समूह के मालिकों और निर्माण कार्य (पुल पर) करने वाले व्यक्तियों की है।’’
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