देश की खबरें | विधायकों ने जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों की बढ़ती लत पर चिंता व्यक्त की
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जम्मू, पांच मार्च जम्मू-कश्मीर विधानसभा के सदस्यों ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर क्षेत्र में नशीले पदार्थों की बढ़ती लत पर बुधवार को गंभीर चिंता व्यक्त की जिसके बाद अध्यक्ष अब्दुल रहीम राठेर ने मादक पदार्थ विरोधी उपायों पर सदन से सुझाव मांगने के लिए चर्चा कराने का आदेश दिया।
कई विधायकों ने नशीले पदार्थों के खतरे से निपटने के लिए मौजूदा तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए। उन्होंने इस मुद्दे की गहराई से जांच करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति और सदन की समिति गठित करने की मांग की।
स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू ने समस्या की गंभीरता को स्वीकार किया, लेकिन सितंबर 2022 में शुरू किए गए नशा मुक्त अभियान के प्रभाव पर प्रकाश डाला।
इटू ने प्रश्नकाल के दौरान नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) के विधायक मुबारक गुल के सवाल का जवाब देते हुए कहा, “जम्मू-कश्मीर के युवाओं में नशे की लत में चिंताजनक वृद्धि हुई है। हालांकि, नशा मुक्त अभियान की शुरुआत के बाद, रिकॉर्ड बताते हैं कि नए पंजीकरण में थोड़ी गिरावट आई है।”
उन्होंने सदन को बताया कि पिछले तीन वर्षों में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न केन्द्रों में नशे के आदी 25,402 लोगों का उपचार किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि पिछले तीन सालों में जहां बाह्य रोगी (ओपीडी) विभाग में नशे की लत के मामलों में कमी आई है, वहीं आंतरिक रोगी (आईपीडी) के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने इस वृद्धि का श्रेय नशा मुक्ति केंद्रों में आंतरिक रोगी सेवाओं के विस्तार को दिया, जिससे देखभाल तक बेहतर पहुंच हो सकी है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विधायक एम.वाई. तारिगामी, कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट, आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक मेहराज मलिक, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक अरविंद गुप्ता और युद्धवीर सेठी तथा नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक हसनैन मसूदी ने पूरक प्रश्न उठाए और संकट से निपटने में एजेंसियों की कथित विफलता पर जवाब मांगा।
तारिगामी ने पूछा, "यह बहुत अहम मुद्दा है। पिछले कई सालों में नशे की लत में भारी बढ़ोतरी हुई है। पिछले दस साल से इस क्षेत्र पर किसने शासन किया? उन्हें इस वृद्धि के लिए जवाब देना चाहिए। उन्होंने इसके समाधान के लिए क्या उपाय किए हैं?"
वर्तमान तंत्र की समीक्षा का आह्वान करते हुए उन्होंने संकट का आकलन करने और प्रभावी ढंग से उससे निपटने के लिए एक विशेषज्ञ दल और सदन की एक समिति के गठन का आग्रह किया।
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