देश की खबरें | केरल में भूस्खलन के एक साल बाद वायनाड में मौसम रडार स्थापित करेगा मौसम विभाग
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नयी दिल्ली/तिरूवनंतपुरम, 11 जून भारत मौसम विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को कहा कि केरल के वायनाड जिले में एक एक्स-बैंड रडार स्थापित किया जाएगा, जहां पिछले साल जुलाई में हुये विनाशकारी भूस्खलन में 400 से अधिक लोग मारे गए थे।
आईएमडी ने केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की उपस्थिति में, पझासिराजा कॉलेज, पुलपल्ली, वायनाड में एक एक्स-बैंड रडार स्थापित करने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की उपस्थिति में सुल्तान बाथरी डायोसिस के विकर जनरल सेबेस्टियन कीपल्ली, तिरुवनंतपुरम मौसम विज्ञान केंद्र की प्रमुख नीता गोपाल और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य सचिव शेखर एल कुरियाकोस ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
इस परियोजना के कार्यान्वयन से मौसम की निगरानी के लिए उत्तर केरल में रडार स्थापित करने की राज्य की 2010 से चली आ रही मांग पूरी हो गई है।
केंद्रीय मौसम विभाग पुलपल्ली के पझासिराजा कॉलेज में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु द्वारा विकसित रडार लगाने का काम शुरू करेगा।
पुलपल्ली में 100 किलोमीटर के क्षेत्र में मौसम की निगरानी करने वाला एक्स-बैंड रडार लगाया जा रहा है। इस रडार से तमिलनाडु और कर्नाटक राज्यों को भी लाभ मिलेगा।
विभाग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘एक्स-बैंड रडार, 100 किमी की सीमा के साथ, आपदा-ग्रस्त पश्चिमी घाट क्षेत्र में मौसम अवलोकन बुनियादी ढांचे के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है।’’
इस पोस्ट में कहा गया है, ‘‘यह अत्याधुनिक प्रणाली मौसम की पूर्वानुमान को और बेहतर बनाएगी, जिससे मौसम की गंभीर घटनाओं के लिए और अधिक तथा समय पर सटीक अलर्ट प्राप्त करने में सुविधा होगी।’’
केरल सरकार ने पहले दावा किया था कि आईएमडी पिछले साल 30 जुलाई को वायनाड में भूस्खलन होने से पहले भीषण मूसलाधार बारिश की भविष्यवाणी करने में विफल रहा।
पिछले साल अगस्त में, वैज्ञानिकों की एक वैश्विक टीम ने कहा कि वायनाड में घातक भूस्खलन का कारण बादल फटना बताया गया था।
भारत, स्वीडन, अमेरिका और ब्रिटेन के 24 शोधकर्ताओं की टीम ने कहा कि एक ही दिन में 140 मिमी से अधिक बारिश हुई थी। उन्होंने कहा कि वहां मिट्टी दो महीने के मानसूनी बारिश के कारण पहले से गीली थी और यही वजह है कि भूस्खलन की घटना हुयी ।
इसके बाद अन्य शोधकर्ताओं ने इसके लिये अलग-अलग कारण गिनाये थे। जिसमें वन क्षेत्र हानि, खनन और मानसून बारिश शमिल है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो)के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर की ओर से पिछले साल जारी भूस्खलन एटलस के अनुसार उच्च भूस्खलन के शीर्ष जोखिम वाले देश के 30 जिलों में से 10 केरल में हैं और वायनाड का स्थान 13 वां है।
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