देश की खबरें | जेएनयू झड़प पर मेस प्रतिनिधियों ने कहा : मेन्यू पूर्व निर्धारित, अंतिम समय में नहीं कर सकते बदलाव

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नयी दिल्ली, 11 अप्रैल राष्ट्रीय राजधानी स्थित जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कावेरी छात्रावास में मांसाहार परोसे जाने को लेकर विद्यार्थियों के दो गुटों में हुई झड़प के एक दिन बाद मेस के प्रतिनिधियों ने सोमवार को कहा कि मेन्यू पहले से ही निर्धारित होता है और अंतिम समय में‘‘ छात्रावास में रहने वालों की सहमति के बिना’’उसे बदला नहीं जा सकता।

वाम दलों से संबद्ध संगठनों की अगुवाई वाले जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) और दक्षिणपंथी एबीवीपी के सदस्यों के बीच रविवार को छात्रावास में रामनवमी के दिन मांसाहार परोसने जाने को लेकर झड़प हो गई थी।

जेएनयूएसयू ने आरोप लगाया कि एबीवीपी के सदस्यों ने रामनवमी के दिन मांसाहार परोसने पर विद्यार्थियों और मेस कर्मियों पर हमला किया जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध छात्र संगठन ने कहा कि ‘‘वामपंथियों’’ ने रामनवमी के अवसर पर छात्रावास में की जा रही पूजा को बाधित किया।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की जेएनयू इकाई के अध्यक्ष रोहित कुमार ने सोमवार को कहा कि सात दिन पहले कावेरी छात्रावास मेस समिति की आम सभा की बैठक बुलाई गई थी जिसमें ‘‘सर्वसम्मति से फैसला’’किया गया था कि रविवार को रामनवमी के अवसर पर छात्रावास के मेस में मांसाहारी व्यंजन नहीं पकेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘ मुस्लिम छात्रों ने भी फैसले पर सहमति जताई थी। तीन दिन पहले जब रामनवमी पूजा का पोस्टर साझा किया गया तो वामपंथी समूह के विद्यार्थियों ने मांस और हड्डियां फेंक पूजा को बाधित करने की धमकी दी थी।

हालांकि, कावेरी मेस के सचिव राघिब ने एबीवीपी के दावे से इंकार किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘आम सभा की बैठक बुलाने के लिए 24 घंटे पहले फैसला किया जाता है। इसके लिए लिखित दस्तावेज होता है और उसपर हस्ताक्षर होता है। क्या वे उस दस्तावेज को दिखा सकते हैं?’’

कावेरी छात्रावास के पूर्व अध्यक्ष नवीन कुमार ने कहा कि मेस का मेन्यू पहले से ही तय होता है और इसे अंतिम समय में नहीं बदला जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘इसे विद्यार्थियों की सहमति से ही बदला जा सकता है।’’

कुमार ने कहा कि एबीवीपी के सदस्य रविवार दोपहर दो बजे से ही मांस की आपूर्ति करने वाले का प्रवेश रोकने की कोशिश कर रहे थे और उन्हें कह रहे थे कि मांस की आपूर्ति नहीं करने दी जाएगी।

उन्होंने कहा, ‘‘उसे वापस जाने को कहा गया और वार्डन, डीन ऑफ स्टूडेंट्स ने विद्यार्थियों से कहा कि यह उनका अपना मामला है। यह परिपाटी है कि मेस में शाकाहारी और मांसाहारी व्यंजन अलग-अलग पकाया जाता है, लेकिन वे अपने खाने की पसंद थोपना चाहते थे। शाम को जब पूजा हुई तो सभी ने प्रसाद लिया और इफ्तार भी शांतिपूर्ण तरीके से बिना किसी बाधा के संपन्न हुआ।

कुमार ने कहा कि शाम साढ़े सात बजे से रात नौ बजे तक विद्यार्थी रोजाना मेस में खाना खाने आते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘रविवार शाम साढ़े सात बजे जब विद्यार्थी यह पता करने आए कि खाने में क्या है और वार्डन ने मामले सुलझाने की सोची तभी एबीवीपी के सदस्य आए और उन्होंने कहा कि ‘ हम आपको खाने नहीं देंगे।’ जेएनएसयू के लोग बातचीत करने के लिए वहां आये, लेकिन एबीवीपी के सदस्यों ने विद्यार्थियों पर हमला कर दिया।’’

राघिब ने दावा किया कि नौ अप्रैल को छात्रावास के वार्डन ने उन्हें कहा था कि अगले दिन राम नवमी को मांसाहार नहीं परोसा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनसे लिखित में मांगा लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बाद में हमने वेंडर से मांस की आपूर्ति करने को कहा। जब मांस आपूर्तिकर्ता आया तो एबीवीपी ने दरवाजा बंद कर दिया और कहा कि वे उसे मांस की आपूर्ति नहीं करने देंगे और उसे अन्य छात्रावासों में भी मांस आपूर्ति का ठेका खत्म करने की धमकी दी।’’

उन्होंने कहा कि छात्रावास के मेस में बुधवार, शुक्रवार और रविवार को मांसाहार व्यंजन बनता है और महीने के शुरू में ही मेन्यू तय कर दिया जाता है। राघिब ने दावा किया वह किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं और एबीवीपी पर मामले का ‘‘राजनीतिकरण करने’’का आरोप लगाया।

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