देश की खबरें | एसवाईएल पर बैठक बेनतीजा, पंजाब और हरियाणा के मुख्यमंत्री अपने-अपने रुख पर अड़े

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उनके राज्य के पास ‘एक बूंद पानी भी साझा’ करने के लिए नहीं है जबकि हरियाणा के उनके समकक्ष मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि नहर का पूरा निर्माण और उसके जरिये पानी प्राप्त करना उनके राज्य का ‘अधिकार’ है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उनके राज्य के पास ‘एक बूंद पानी भी साझा’ करने के लिए नहीं है जबकि हरियाणा के उनके समकक्ष मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि नहर का पूरा निर्माण और उसके जरिये पानी प्राप्त करना उनके राज्य का ‘अधिकार’ है।

खट्टर ने यह भी कहा कि हरियाणा उच्चतम न्यायालय को सूचित करेगा कि पंजाब मामले में उसके आदेश का अनुपालन नहीं कर रहा है। बाद में यहां जारी बयान में खट्टर ने कहा, ‘‘नहर के निर्माण पर चर्चा करने के बजाय पंजाब के मुख्यमंत्री लगातार कह रहे हैं कि साझा करने के लिए पानी नहीं है।’’

उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल सितंबर में निर्देश दिया था कि दोनों राज्य के मुख्यमंत्री बैठक कर एसवाईएल निर्माण के सौहार्द्रपूर्ण समाधान के लिए काम करें।

सूत्र ने बताया कि बुधवार की बैठक के दौरान शेखावत ने दोनों मुख्यमंत्रियों से समाधान के साथ आने को कहा, लेकिन मान ने कहा कि ‘‘ पंजाब के 150 ब्लॉक में से 78 प्रतिशत में भूजल स्तर नीचे चले जाने की वजह से जल की भारी कमी है और इसलिए पंजाब किसी भी राज्य से पानी साझा नहीं कर सकता।

यहां जारी बयान में मान ने कहा, ‘‘उनके राज्य के पास हरियाणा के साथ साझा करने के लिए एक बूंद भी पानी नहीं है।’’ उन्होंने मांग की कि पंजाब को हरियाणा से गुजरने वाली यमुना नदी से पानी मिलना चाहिए।

मान ने कहा, ‘‘एसवाईएल (सतलुज-यमुना लिंक) पर नहीं बल्कि हरियाणा को वाईएसएल (यमुना सतलुज लिंक) पर बात करनी चाहिए।

उन्होंने राज्य में उपलब्ध जल का नए सिरे से आकलन करने के लिए नए सिरे से अधिकरण बनाने की भी मांग की।

सूत्र ने बताया खट्टर ने कहा कि राज्य का एसवाईएल नहर का पूरा निर्माण कर रावी और ब्यास नदियों का पानी पाने का अधिकार है।

गौरतलब है कि एसवाईएल नहर को लेकर दशकों से पंजाब और हरियाणा के बीच विवाद है। इस मुद्दे पर दोनों मुख्यमंत्रियों की सहमति नहीं बनने पर शेखावत ने यह बैठक बुलाई थी।

पंजाब का कहना है कि रावी और ब्यास नदियों के जल में उल्लेखनीय कमी आई है और इसलिए उसके स्तर (जल साझा करने के लिए) को कम किया जाना चाहिए।

सूत्र ने बताया, ‘‘दोनों पक्षों ने अपना-अपना तर्क रखा और जल शक्ति मंत्री ने उनसे इस मुद्दे पर आपसी समाधान के साथ आने को कहा।’’

गौरतलब है कि एसवाईएल की परिकल्पना रावी और ब्यास नदियों के प्रभावी जल आवंटन के लिए की गई थी। इस परियोजना में 214 किलोमीटर लंबी नहर बननी है जिनमें से 122 किलोमीटर पंजाब के हिस्सें है और 92 किलोमीटर हरियाणा में है। हरियाणा अपने हिस्से का काम पूरा कर चुका है। पंजाब ने नहर निर्माण की शुरुआत वर्ष 1982 में की लेकिन बाद में काम रोक दिया।

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