देश की खबरें | चिकित्सकों के दल ने मणिपुर का दौरा किया, राहत शिविरों में स्वास्थ्य संबंधी हालात पर चिंता जताई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. हिंसा पीड़ित मणिपुर का दौरा करने वाले चिकित्सकों के एक दल ने यहां राहत शिविरों में रह रहे लोगों में पोषण संबंधी समस्या और उनके मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति पर चिंता जताई है।
नयी दिल्ली, चार सितंबर हिंसा पीड़ित मणिपुर का दौरा करने वाले चिकित्सकों के एक दल ने यहां राहत शिविरों में रह रहे लोगों में पोषण संबंधी समस्या और उनके मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति पर चिंता जताई है।
मणिपुर में मेइती और कुकी समुदाय के हजारों लोग राहत शिविरों में रह रहे है।
‘इंडियन डॉक्टर्स फॉर पीस एंड डेवल्पमेंट’ के चिकित्सकों के एक दल ने मेइती और कुकी बहुल क्षेत्रों में एक-एक राहत शिविर का दौरा किया।
इस टीम में डॉ. अरुण मित्रा, डॉ. शकील, डॉ. रजनी और डॉ. रवींद्रनाथ शामिल थे। वे एक से तीन सितंबर तक मणिपुर में रहे। उन्होंने इंफाल स्थित ‘खुमानलांकपाक स्पोर्ट्स हॉस्टल’ में एक राहत शिविर और पहाड़ी क्षेत्र के कांगपोकपी जिले में आईआईटी राहत शिविर का दौरा किया। मणिपुर में फिलहाल ऐसे 334 राहत शिविर हैं।
चिकित्सकों ने इन राहत शिविरों में रह रहे लोगों के साथ-साथ जिला प्रशासन के नोडल अधिकारियों से भी मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि पहाड़ी इलाकों में विस्थापित लोग जातीय संघर्ष के बीच इंफाल से कट गए हैं और ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच मुश्किल है।
मित्रा ने सोमवार को कहा, ‘‘पहाड़ी इलाकों में रहने वालों को 150 किलोमीटर दूर स्थित नगालैंड के कोहिमा या दीमापुर या लगभग 450 किलोमीटर दूर असम के गुवाहाटी जाना पड़ता है, क्योंकि कुकी और मेइती एक-दूसरे के क्षेत्रों में प्रवेश नहीं कर रहे और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं केवल इंफाल में उपलब्ध हैं।’’
चिकित्सकों के दल द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट के अनुसार, कांगपोकपी जिला अस्पताल में न तो कोई ऑपरेशन थिएटर है और न ही रक्त भंडारण की सुविधा है। इसमें कहा गया है कि मणिपुर विशेषज्ञों, अन्य चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों की भारी कमी से भी जूझ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वोत्तर राज्य के अधिकतर विशेषज्ञ, चिकित्सक और सभी मेडिकल कॉलेज अस्पताल इम्फाल जिले और चुराचांदपुर में हैं, जो हिंसा से प्रभावित हैं।
शकील ने कहा कि शिविरों में केवल दाल, चावल और आलू की आपूर्ति की जाती है और हरी या पत्तेदार सब्जियां नहीं दी जा रही।
रिपोर्ट में इम्फाल घाटी के एक राहत शिविर में रह रहे लोगों और एक नोडल अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि उन्हें राशन में हरी या पत्तेदार सब्जियां, अंडे, मांस और मछली की आपूर्ति कभी नहीं की गई , लेकिन स्थानीय समुदायों ने कुछ सब्जियों की व्यवस्था की थी। पहाड़ियों में एक राहत शिविर के एक अन्य नोडल अधिकारी ने कहा कि लोगों को हर दो सप्ताह में एक-एक अंडा मिलता है, लेकिन हरी सब्जियों की आपूर्ति नहीं की जाती।
चिकित्सकों ने सिफारिश की कि इन शिविरों में रह रहे लोगों को विटामिन ए की गोलियां दी जाएं और उन्होंने सरकार से खसरे से निपटने के लिए टीकाकरण अभियान चलाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि शिविरों में बहुत भीड़ है और पानी की उपलब्धता की कमी है। उन्होंने कहा कि सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध तो हैं, लेकिन उनकी आपूर्ति पर्याप्त नहीं है।
चिकित्सकों ने कहा कि इसके अलावा शिविरों में रह लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं, जो खासकर ऐसे समय में सबसे बड़ी चुनौती है, जब शिविरों में मनोवैज्ञानिक परामर्श की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)