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देश की खबरें | महाराष्ट्र: अदालत ने मकोका के तहत गिरफ्तार छह लोगों को सबूतों के अभाव में बरी किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने पूर्व पार्षद समेत छह लोगों को एक मोबाइल दुकान के मालिक से जबरन वसूली और उस पर हमला करने के आरोप में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज मुकदमे में ‘सबूतों के अभाव’ व अभियोजन पक्ष की ‘प्रक्रियागत खामियों’ का हवाला देते हुए बरी कर दिया है।

देश की खबरें | महाराष्ट्र: अदालत ने मकोका के तहत गिरफ्तार छह लोगों को सबूतों के अभाव में बरी किया

ठाणे, तीन जनवरी महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने पूर्व पार्षद समेत छह लोगों को एक मोबाइल दुकान के मालिक से जबरन वसूली और उस पर हमला करने के आरोप में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज मुकदमे में ‘सबूतों के अभाव’ व अभियोजन पक्ष की ‘प्रक्रियागत खामियों’ का हवाला देते हुए बरी कर दिया है।

ठाणे जिले में मकोका मामलों की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने एक जनवरी को फैसला सुनाया, जिसमें आरोपियों को उपरोक्त कारणों के साथ-साथ गवाहों की ‘अविश्वसनीय गवाही’ के लिए ‘संदेह का लाभ’ दिया गया।

कल्याण के महात्मा फुले चौक थाने में 2022 में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें आरोपियों पर जबरन वसूली, हत्या का प्रयास और एक संगठित अपराध में शामिल होने का आरोप लगाया गया था।

बरी किए गए आरोपियों की पहचान सतेज उर्फ ​​बाला सुरेश पोकल (30), सचिन समसन खेमा (44), कल्याण डोंबिवली नगर निगम के पूर्व पार्षद व ठेकेदार, नितिन समसन खेमा (41), प्रेम हरिभाऊ चौधरी (33), तोहित उर्फ ​​बबलू मजीद शेख (24) और गणेश विलास रोकड़े (29) के रूप में हुई है।

विशेष मकोका अदालत के न्यायाधीश अमित एम शेटे ने कहा कि अभियोजन पक्ष के मामले में कई महत्वपूर्ण कमियां थीं।

न्यायाधीश ने जब्त की गई महत्वपूर्ण वस्तुओं को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) में भेजने में ‘काफी देरी’ को रेखांकित किया।

अदालत ने कहा, “जब्त की गई वस्तुओं को जब्ती के लगभग तीन महीने बाद एफएसएल भेजा गया, जिससे छेड़छाड़ की संभावना बढ़ गई। यह देरी अभियोजन पक्ष के बयान को गंभीर रूप से कमजोर करती है।”

न्यायाधीश ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता और घायल पक्षों सहित अभियोजन पक्ष के गवाह सुसंगत विवरण देने में असफल रहे।

उन्होंने कहा, “साक्ष्यों की कमी, प्रक्रियागत चूक और अविश्वसनीय गवाही को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ दिया। ”

अदालत ने कहा, “” प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर अभियुक्त को दोषी ठहराना सही नहीं है।

अभियोजन पक्ष भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और मकोका दोनों के तहत आरोप साबित करने में विफल रहा है।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jan 03, 2025 05:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).