देश की खबरें | महाराष्ट्र: 12वीं बोर्ड परीक्षा में 94.22 फीसदी विद्यार्थी उत्तीर्ण, लड़कियों का प्रदर्शन बेहतर
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कोविड-19 महामारी के दौरान पिछले साल हुई परीक्षा के परिणामों की तुलना में महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड द्वारा इस वर्ष ऑफलाइन मोड में आयोजित कक्षा 12 की परीक्षाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत कम रहा।
पुणे (महाराष्ट्र), आठ जून कोविड-19 महामारी के दौरान पिछले साल हुई परीक्षा के परिणामों की तुलना में महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड द्वारा इस वर्ष ऑफलाइन मोड में आयोजित कक्षा 12 की परीक्षाओं का उत्तीर्ण प्रतिशत कम रहा।
महाराष्ट्र माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा बुधवार को घोषित नतीजे के मुताबिक, इस साल कुल 94.22 फीसदी छात्रों ने उच्च माध्यमिक शिक्षा (एचएससी) परीक्षा उत्तीर्ण की। पिछले साल राज्य बोर्ड की एचएससी परीक्षा में 99.63 फीसदी छात्र उत्तीर्ण हुए थे।
बोर्ड अध्यक्ष शरद गोसावी द्वारा घोषित परिणामों के अनुसार, इस साल लड़कियों ने लड़कों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया क्योंकि लड़कियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 95.35 प्रतिशत रहा जबकि लड़कों का 93.29 प्रतिशत रहा।
गोसावी ने कहा कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर, परीक्षा आयोजित कराने में बोर्ड को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
परीक्षा ऑनलाइन या ऑफलाइन आयोजित की जाए, इस पर विचार-विमर्श हुआ लेकिन महाराष्ट्र सरकार, शिक्षा बोर्ड, शिक्षकों, छात्रों और विभिन्न संगठनों के सामूहिक सहयोग से बोर्ड ऑफलाइन परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित कर सका।
गोसावी ने कहा कि वे इस साल के परिणाम की तुलना 2021 से नहीं कर रहे हैं, क्योंकि बोर्ड ने पिछले साल परीक्षा आयोजित नहीं की थी।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल, समग्र उत्तीर्ण प्रतिशत 99.63 था। परिणाम तब 30:30:40 के फार्मूले के आधार पर घोषित किए गए थे, जहां कक्षा 10वीं की परीक्षा में सर्वश्रेष्ठ तीन विषयों के औसत को 30 प्रतिशत ‘वेटेज’ दिया गया था, 30 प्रतिशत कक्षा 11 के अंकों को और कक्षा 12वीं में आंतरिक मूल्यांकन को 40 प्रतिशत ‘वेटेज’ दिया गया था।’’
गोसावी ने कहा, ‘‘हम 2020 (90.66 प्रतिशत) और 2022 (94.22) के परिणामों की तुलना कर सकते हैं, क्योंकि दोनों परीक्षाएं ऑफ़लाइन आयोजित की गई थीं।’’
इस वर्ष, छात्रों को सुविधा के तौर पर अपने पेपर लिखने के लिए अतिरिक्त 30 मिनट का समय दिया गया था, परीक्षा केंद्र उनके अपने स्कूल थे और पाठ्यक्रम में भी 30 प्रतिशत की कमी की गई थी।
परीक्षा के लिए कुल 14,59,664 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था। उनमें से 14,39,731 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए और 13,56,604 उत्तीर्ण हुए।
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