देश की खबरें | महाकुंभ: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संगम में डुबकी लगाई, अक्षयवट, बड़े हनुमान जी के दर्शन किए

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महाकुंभ नगर, 10 फरवरी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ-2025 के त्रिवेणी संगम में सोमवार को डुबकी लगाई और बड़े हनुमान जी, अक्षयवट और सरस्वती कूप के दर्शन किए।

इस दौरान प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति सुबह विशेष विमान से प्रयागराज हवाई अड्डे पहुंचीं, जहां राज्यपाल पटेल और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। वहां से वह अरैल पहुंचीं और नाव से संगम पहुंचकर स्नान किया।

अधिकारियों के अनुसार, नाव से संगम घाट जाते समय आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति मुर्मू को गंगा और यमुना नदी तथा उसके प्रवाह के बारे में जानकारी दी।

नाव से घाट जाते समय राष्ट्रपति ने साइबेरियाई पक्षियों को दाना भी डाला। संगम में स्नान करने के उपरांत मुर्मू ने गंगा में नारियल और पुष्प अर्पित किए तथा सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। डुबकी लगाने के दौरान राष्ट्रपति को सफेद रंग का सलवार-सूट पहने देखा गया।

स्नान के बाद राष्ट्रपति ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच, गंगा आरती तथा पूजा-अर्चना की।

सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, राष्ट्रपति ने संगम में पवित्र स्नान के उपरांत धार्मिक आस्था को और अधिक मजबूती देने के लिए अक्षयवट का दर्शन-पूजन किया।

सनातन संस्कृति में अक्षयवट को अमरता का प्रतीक माना जाता है तथा यह हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण स्थल है, जिसकी महत्ता पुराणों में भी वर्णित है।

इसके अलावा राष्ट्रपति यहां सरस्वती कूप के दर्शन को भी पहुंचीं। उन्होंने बड़े हनुमान मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया और देशवासियों के लिए सुख-समृद्धि की कामना की।

मंदिर के महंत और बाघंबरी पीठ के पीठाधीश्वर बलबीर गिरि ने विधि विधान से पूजन संपन्न कराया और राष्ट्रपति को मंदिर की प्रतिकृति भेंट की।

आधिकारिक बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति आधुनिक भारत और डिजिटल युग के साथ धार्मिक आयोजनों को जोड़ने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ की पहल को देखने ‘डिजिटल महाकुंभ अनुभूति केंद्र’ गईं।

इस केंद्र में महाकुंभ मेले की विस्तृत जानकारी तकनीकी माध्यमों से उपलब्ध कराई जा रही है। देश-विदेश के श्रद्धालु महाकुंभ के आयोजन को और अधिक निकटता से अनुभव कर सकें, इसलिए इस केंद्र को स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने उन्हें इस केंद्र की विशेषताओं से अवगत कराया।

देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भी महाकुंभ के दौरान संगम में स्नान किया था।

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