चेन्नई, 21 जुलाई सास की हत्या के प्रयास के अभियुक्त की दोषसिद्धि और 10 साल के सश्रम कारावास की सजा के निचली अदालत के फैसले को मद्रास उच्च न्यायालय ने इस आधार पर निरस्त कर दिया है कि पीड़िता (सास) ने उसे माफी दे दी है।
अदालत ने आरोपी की पत्नी और उसके तीन बच्चों के भी साथ रहने की इच्छा का संज्ञान लिया।
न्यायमूर्ति डी भरत चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘शीर्ष अदालत ने कहा था कि यदि मामला वैवाहिक संघर्ष से जुड़ा हो, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 307 और 324 के तहत अपराध के बावजूद, यदि पति-पत्नी साथ रहना चाहते हैं और उन्होंने अपने मतभेद दूर कर लिये हैं तो अदालत दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकती है और उनके बीच के मुकदमे को समाप्त कर सकती है। इस मामले के मद्देनजर यह सिद्धांत दोषसिद्धि के बाद भी लागू होता है।’’
न्यायालय ने कहा कि उपरोक्त सिद्धांत के मद्देनजर पति एवं पत्नी के बीच के विवाद के निपटारे की बात रिकॉर्ड पर ली जाती है और अपील की अनुमति दी जाती है और याचिकाकर्ता को बरी किया जाता है।
न्यायाधीश ने तमिलनाडु में सलेम जिले के आथर के शिवसुब्रमणि की अपील स्वीकार कर ली। अपीलकर्ता ने सलेम के विशेष न्यायाधीश (महिला अदालत) द्वारा इस वर्ष मई में पारित आदेश को निरस्त करने की मांग की थी।
आरोपी व्यक्ति ने एक वैवाहिक विवाद में अपनी सास को दिसम्बर 2017 में जख्मी कर दिया था।
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