देश की खबरें | कानून मंत्री मेघवाल ने आपराधिक कानून में आमूल-चूल बदलाव को उचित ठहराया

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नयी दिल्ली, 25 अगस्त कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और साक्ष्य अधिनियम को बदलने के लिए विधेयक लाकर आपराधिक कानूनों में आमूल-चूल बदलाव लाने को शुक्रवार को उचित ठहराया और कहा कि ये कानून अंग्रेजों द्वारा भारतीयों पर थोपे गए थे।

मेघवाल ने अपने मंत्रालय की ‘टेली लॉ’ योजना पर यहां एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘ जब हम अमेरिका और ब्रिटेन में दी जा रही ‘प्रो बोनो’ सेवाओं (वकीलों द्वारा मुफ्त कानूनी मदद) का उल्लेख करते हैं, तो हम यह भूल जाते हैं कि भारत भी ऐसे ही मॉडल का अनुसरण करता रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ ऐसा इसलिए है, क्योंकि हमारी मानसिकता ऐसी है कि हम मानते हैं कि अगर वहां हो रहा है, तो वह अच्छा ही होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आश्चर्य हुआ कि क्या हम भारतीयता के आधार पर काम कर सकते हैं।’’

मेघवाल ने कहा कि इसके आधार पर, गृहमंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए गए विधेयकों के माध्यम से भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और साक्ष्य अधिनियम में सुधार के लिए एक बड़ा निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे भारतीय न्याय संहिता क्यों नहीं कह सकते?’’

उन्होंने तर्क दिया कि जिसे हम 1857 में भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम कहते हैं, उसे अंग्रेजों ने "विद्रोह" कहा था।

मेघवाल ने कहा, ‘‘जब भारत में प्रत्यक्ष ब्रिटिश शासन शुरू हुआ, तो उन्होंने कानूनों को संहिताबद्ध करना शुरू किया। 1834 में, आयरिश दंड संहिता बनाई गई थी। उन्होंने 'आयरिश' को 'इंडियन' से बदल दिया और हम पर लागू किया, बल्कि इसे हम पर थोप दिया। हमने इसे स्वीकार कर लिया। कभी किसी ने नहीं सोचा कि हमें भारतीयता के आधार पर सोचना चाहिए।’’

गृह मंत्री अमित शाह ने 11 अगस्त को भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेने के लिये तीन विधेयक - भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य विधेयक- लोकसभा में पेश किए थे।

तीनों विधेयकों को अब गृह मामलों की संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया गया है, जिसके तीन महीने में अपनी सिफारिशें देने की उम्मीद है।

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