देश की खबरें | लालू, नीतीश ने सोनिया से मुलाकात की; भाजपा को हराने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने पर जोर दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने रविवार को यहां कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। बाद में, नीतीश और लालू ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का एकजुटता से मुकाबला करने के लिए व्यापक सहमति है, लेकिन कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुने जाने के बाद ही एक ठोस योजना तैयार की जाएगी।

नयी दिल्ली, 25 सितंबर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने रविवार को यहां कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। बाद में, नीतीश और लालू ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का एकजुटता से मुकाबला करने के लिए व्यापक सहमति है, लेकिन कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुने जाने के बाद ही एक ठोस योजना तैयार की जाएगी।

जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता और राजद सुप्रीमो की सोनिया से मुलाकात को 2024 के आम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

सोनिया के 10 जनपथ स्थित आवास पर हुई बैठक को विपक्षी दलों को एकजुट करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस और कुछ क्षेत्रीय दलों के बीच मतभेद दूर करने के प्रयास जारी हैं।

अगस्त में बिहार में भाजपा से नाता तोड़ने तथा राज्य में नयी सरकार बनाने के लिए राजद और कांग्रेस से हाथ मिलाने के बाद से कुमार की सोनिया गांधी से यह पहली मुलाकात है।

लंबे समय के बाद, लालू प्रसाद की भी सक्रिय रूप से यह पहली राजनीतिक बैठक थी। वह कुछ समय से बीमार थे।

सोनिया के साथ बैठक के बाद, कुमार ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष के साथ बातचीत की क्योंकि उनका मानना है कि विपक्षी दलों को एकजुट होना चाहिए और भविष्य में देश की प्रगति के लिए काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने इन विषयों पर बातचीत की...लेकिन कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव होने जा रहा है और उसके बाद ही वह (सोनिया गांधी) कुछ कह सकती हैं।’’

कुमार ने कहा कि भाजपा का मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों के एकजुट होने पर व्यापक सहमति है, लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के बाद ही एक ठोस कार्य योजना तैयार की जा सकेगी।

उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस के संगठनात्मक चुनावों के बाद हम आगे की बातचीत करेंगे।’’

समान विचार जाहिर करते हुए लालू प्रसाद ने कहा, ‘‘हमें भाजपा को हटाना है और देश को बचाना है। इसके लिए, हम सभी को उसी तरह से काम करने की जरूरत है, जैसा कि बिहार में किया गया और वहां भाजपा को सत्ता से बाहर किया ।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी एकजुट हैं। हमने सोनिया जी से कहा कि कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है। सभी को बुलाना चाहिए और बातचीत करनी चाहिए तथा उन्हें (भाजपा को) 2024 में विदा किया जाना चाहिए।’’

लालू प्रसाद ने बताया कि सोनिया गांधी ने उनसे कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अध्यक्ष पद के चुनाव होने जा रहे हैं और इस चुनाव के बाद वे फिर से बैठक करेंगे, तब कांग्रेस के नये अध्यक्ष के साथ सभी लोग चर्चा कर सकते हैं।

राजद प्रमुख ने कहा, ‘‘यह सर्वविदित है कि कांग्रेस हमेशा ही भाजपा की विरोधी रही है। देश तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। गरीबी, बेरोजगारी व्याप्त है, पर कुछ नहीं किया गया और विपक्षी दलों के नेताओं को जेल में डाल दिया गया। लेकिन हम नहीं डरने वाले हैं। हमने बात की है और उनसे (सोनिया से) फिर मिलेंगे।’’

कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है और एक से अधिक उम्मीदवार रहने पर चुनाव 17 अक्टूबर को होगा।

इससे पहले दिन में, कुमार ने कांग्रेस और वामपंथी दलों सहित सभी विपक्षी दलों से भाजपा का मुकाबला करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया और कहा कि ‘‘विपक्ष का मुख्य मोर्चा’’ 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की करारी शिकस्त को सुनिश्चित करेगा।

कुमार ने हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) द्वारा पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल की जयंती के मौके पर आयोजित एक रैली में कहा कि अगर सभी गैर-भाजपा दल एकजुट होते हैं तो देश को तबाह करने वालों से छुटकारा मिल सकता है।

कांग्रेस के साथ टकराव का लंबा इतिहास रखने वाले इनेलो नेता ओम प्रकाश चौटाला और शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल मंच पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के शरद पवार, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सीताराम येचुरी और शिवसेना के अरविंद सावंत जैसे अन्य नेता वरिष्ठ नेताओं के साथ मौजूद थे।

बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव भी मंच पर थे, जिसे गैर-भाजपा दलों के बीच एकता की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, कांग्रेस की ओर से कोई भी रैली में शामिल नहीं हुआ।

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