नयी दिल्ली, 21 जून हाथ वाले फव्वारे, मच्छरदानी, जैव-शौचालय, पॉवर सॉकेट, ऑक्सीजन सिलेंडर और कई अन्य सुविधाओं से लैस रेलवे के कोविड-देखभाल डिब्बों में मरीजों के आरामदायक उपचार के लिए लगभग सभी चीजें हैं लेकिन धातु के इन डिब्बों में वे शायद ही गर्मी झेल पाएं।
कोविड-19 के प्रसार से निपटने के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करने के सरकार के प्रयास में तेजी लाते हुए रेलवे ने 5,321 गैर वातानुकूलित शयनयानों को हल्के लक्षण वाले और संदिग्ध मरीजों के लिए कोविड केयर लेवल 1 सेंटर में तब्दील किया है।
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अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध और सत्यापित मरीजों को अलग अलग डिब्बों में रखा जाएगा तथा पांच राज्यों में 960 डिब्बों को पहले ही तैनात कर दिया गया। उनमें से दिल्ली में 503 और उत्तर प्रदेश में 372 डिब्बे लगाए गए हैं।
ये डिब्बे उपयोग में आने के लिए तैयार हैं लेकिन उन्हें लेने वाला कोई नहीं है। दो या उससे अधिक वातानुकूलित डिब्बे चिकित्साकर्मियों के आराम के लिए दिये जाएंगे।
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जून गर्म महीना है और देश के कई हिस्सों में यह सबसे गर्म महीना होता है । ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि मरीज आरामदेह कैसे रहें। अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि मानसून आने के साथ कुछ राहत मिल जाएगी। हालांकि कुछ अधिकारियों ने दबे स्वर में कहा कि अन्यथा ये डिब्बे व्यर्थ हो जाएंगे।
अधिकारियों के अनुसार स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन गैर वातानुकूलित डिब्बों के इस्तेमाल की इजाजत दी थी लेकिन इन डिब्बों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है जो असहनीय हो जाता है।
रेलवे इन डिब्बों के अंदर तापमान घटाने के लिए अब विकल्पों को आजमा रहा है। उनमें खिड़कियों पर बांस की खपच्चियां लगाना, छत पर पानी की फुहार करना और उष्मारोधी लेप चढ़ाना या कूलर लगाना आदि शामिल हैं।
उसने गर्मी को दूर रखने और डिब्बों के अंदर आरामदेह स्थिति बनाने के लिए उनके ऊपर कवर शीटों का भी इस्तेमाल किया है।
एक अधिकारी ने कहा कि इन उपायों से डिब्बे में तापमान एक डिग्री घट जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार डिब्बों में माहौल को ठंडा बनाने के लिए भले ही कोशिश चल रही है लेकिन वे बारिश के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
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