जरुरी जानकारी | कोविड-19 से राजकोषीय स्थिति में आई मजबूती का तीन साल का लाभ गंवा देंगे राज्य: आरबीआई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. कोविड- 19 महामारी का मुकाबला करते हुये राज्यों में हुये अतिरिक्त खर्च के कारण पिछले तीन साल के दौरान राज्यों की राजकोषीय स्थिति में जो सुधार की स्थिति बन रही थी उसका लाभ अब जाता रहेगा। भारतीय रिजर्व बैंक की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई।
मुंबई, 27 अक्टूबर कोविड- 19 महामारी का मुकाबला करते हुये राज्यों में हुये अतिरिक्त खर्च के कारण पिछले तीन साल के दौरान राज्यों की राजकोषीय स्थिति में जो सुधार की स्थिति बन रही थी उसका लाभ अब जाता रहेगा। भारतीय रिजर्व बैंक की मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गई।
रिजर्व बैंक की राज्यों के 2020-21 के बजट के अध्ययन पर आधारित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में राज्यों का सकल राजकोषीय घाटा (जीएफडी) बढ़ेगा।
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रिजर्व बैंक की ‘कोविड-19 और भारत में इसका स्थानिक परिमाण’ शीर्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों ने 2020-21 में एकीकृत जीएफडी सकल घरेलू उत्पाद के 2.8 प्रतिशत रहने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, कोविड-19 महामारी की वजह से यह बजट अनुमानों की तुलना में कहीं अधिक रहेगा। इससे राज्यों को पिछले तीन साल के दौरान जो राजकोषीय सुद्रढ़ता के मामले में लाभ हुआ, वे उसे गंवा देंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 का प्रकोप शुरू होने से पहले बजट पेश करने वाले राज्यों का औसत जीएफडी राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.4 प्रतिशत अनुमानित था, वहीं, लॉकडाउन के बाद बजट पेश करने वाले राज्यों का औसत जीएफडी 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
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रिपोर्ट कहती है कि खर्च की गुणवत्ता और राज्यों के बजट की विश्वसनीयता काफी महत्वपूर्ण है। राज्यों के लिए अगले कुछ साल काफी चुनौतीपूर्ण होंगे। उन्होंने महामारी के दौरान बचाव के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
रिजर्व बैंक ने कहा है कि आगे चलकर उन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि को रफ्तार देने के लिए सशक्त रहना है। साथ ही भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए जुझारू क्षमता पैदा करनी है।
इसमें कहा गया है कि राज्यों को इस तरह के मुश्किल समय से निकलने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने और सशक्त रहने की जरूरत है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल स्थिरता को कायम रखने, खर्च की गुणवत्ता और बजट की विश्वसनीयता के आधार पर एक राज्य की जुझारू क्षमता दूसरे की तुलना में भिन्न होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी के बाद नए सामान्य में सार्वजनिक सेवाओं के प्रावधानों में सुधार के लिए राज्यों को डिजिटल ढांचा बनाने पर ध्यान देना होगा। साथ ही शहरी बुनियादी ढांचे का उन्नयन करना होगा और कोविड-19 से प्रभावित शहरों की जुझारू क्षमता को बेहतर करना होगा।
अजय
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