कोविड-19: अदालत ने बीएमसी से प्रसूति गृहों, क्लीनिकों पर जानकारी मांगी

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति अमजद सैयद की खंडपीठ ने शुक्रवार को मुहीउद्दीन वैद की याचिका पर सुनवाई की जिसमें सरकारी जे जे अस्पताल की एक घटना पर चिंता जताई गयी थी। याचिका में दावा किया गया कि जे जे अस्पताल में एक गर्भवती महिला को भर्ती करने से इनकार कर दिया गया क्योंकि उसके पास कोविड-19 का संक्रमण नहीं होने की बात प्रमाणित करने वाली रिपोर्ट नहीं थी।

जमात

मुंबई, 16 मई बंबई उच्च न्यायालय ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) को यहां उन प्रसूति गृहों और क्लीनिकों की जानकारी वाला हलफनामा दाखिल करने को कहा है जहां कोविड-19 महामारी के बीच डॉक्टर गर्भवती महिलाओं को देख रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति अमजद सैयद की खंडपीठ ने शुक्रवार को मुहीउद्दीन वैद की याचिका पर सुनवाई की जिसमें सरकारी जे जे अस्पताल की एक घटना पर चिंता जताई गयी थी। याचिका में दावा किया गया कि जे जे अस्पताल में एक गर्भवती महिला को भर्ती करने से इनकार कर दिया गया क्योंकि उसके पास कोविड-19 का संक्रमण नहीं होने की बात प्रमाणित करने वाली रिपोर्ट नहीं थी।

याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि सरकार और नगर निकायों को महामारी के प्रकोप के दौरान गर्भवती महिलाओं के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश दिया जाए।

हालांकि राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में दावा किया कि जे जे अस्पताल में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है।

बीएमसी के वकील अनिल सखारे ने अदालत को बताया कि शहर में बड़ी संख्या में प्रसूति गृहों और क्लीनिकों में गर्भवती महिलाओं को देखा जा रहा है।

अदालत ने तब बीएमसी को निर्देश दिया कि शहर में ऐसे प्रसूति गृहों और क्लीनिकों के नाम और अन्य जानकारी के साथ हलफनामा दाखिल किया जाए जो गर्भवती महिलाओं को भर्ती कर रहे हैं या उन्हें देख रहे हैं।

पीठ ने कहा कि राज्य के हलफनामे में यह जानकारी भी होनी चाहिए कि इन प्रसूति गृहों और क्लीनिकों में पिछले कुछ सप्ताह में कितने प्रसव हुए हैं।

मामले में अगली सुनवाई 22 मई को होगी।

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