देश की खबरें | यमनी नागरिक की हत्या का मामला: केंद्र को ‘ब्लड मनी’ का निर्देश देने से उच्च न्यायालय का इनकार

नयी दिल्ली, 12 अप्रैल दिल्ली उच्च न्यायालय ने यमनी नागरिक की हत्या के मामले में यमन में मौत की सजा का सामना कर रही केरल की एक महिला को बचाने के लिए केंद्र सरकार को ‘ब्लड मनी’ भुगतान पर बातचीत करने का निर्देश देने से मंगलवार को इनकार कर दिया।

‘ब्लड मनी’ से तात्पर्य सजा में माफी पाने के लिए अपराधी या उसके परिजनों द्वारा मृतक के परिवार को दिए गए मुआवजे से है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला पीठ ने कहा कि एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ 'सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल' की अपील में कोई दम नहीं है।

याचिका में केंद्र को यमन में महिला की दोषसिद्धि के खिलाफ कानूनी उपाय करने, राजनयिक सहायता और दुभाषिए उपलब्ध कराने, दोषी के परिवार को यात्रा की सुविधा प्रदान करने और मृतक के परिवार के साथ ‘ब्लड मनी’ भुगतान पर बातचीत करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था।

एकल न्यायाधीश ने पिछले महीने पारित अपने आदेश में महिला को यमन में सुनाई गई मौत की सजा के संबंध में ‘ब्लड मनी’ के भुगतान में केंद्र सरकार की भागीदारी का निर्देश देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि कोई भी दूतावास ‘ब्लड मनी’ संबंधी बातचीत का हिस्सा नहीं हो सकता।

पीठ ने कहा, ‘‘जो राहत मिल सकती थी वह एकल न्यायाधीश ने दी है। आपके मन में क्या है? आपको जाकर बातचीत करनी चाहिए। आपको कौन रोक रहा है?"

अदालत ने आदेश में कहा, “यह अपीलकर्ता पर है कि वह अब यमन जाए और मृतक के परिवार के साथ बातचीत करे। हमें अपील में कोई दम नहीं लगता। ”

केंद्र सरकार के वकील अनुराग अहलूवालिया ने कहा कि अधिकारी दोषसिद्धि के संबंध में सभी कानूनी कार्रवाई शुरू करेंगे और उन्होंने राजनयिक पहुंच की बात से भी इनकार नहीं किया है, लेकिन भारत सरकार ‘ब्लड मनी’ संबंधी बातचीत में शामिल नहीं होगी।

अपीलकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि वह चाहते हैं कि केंद्र सरकार वार्ता में शामिल हो।

अदालत ने कहा, ‘‘अपीलकर्ता का रुख बल्कि भ्रमित करने वाला है। उसकी इच्छा है कि भारत संघ मृतक के परिवार से ‘ब्लड मनी’ संबंधी बातचीत करे। संघ का रुख स्पष्ट है। इस संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है।’’

अपीलकर्ता के वकील ने कहा कि ‘ब्लड मनी’ के भुगतान के लिए बातचीत सफल होने की स्थिति में धन के हस्तांतरण के लिए केंद्र की सहायता की आवश्यकता होगी।

अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता उस चरण तक पहुंचने के बाद "वापस (अदालत) आ सकता है।"

एकल न्यायाधीश के समक्ष याचिका में, अपीलकर्ता ने कहा था कि प्रिया यमन में काम करने वाली एक भारतीय नर्स है और उसे 2020 में यमनी नागरिक की हत्या मामले में दोषी ठहराया गया था।

इसमें कहा गया था कि प्रिया पर तब तलाल अब्दो महदी की हत्या का आरोप लगाया गया था, जिसकी जुलाई 2017 में मृत्यु हो गई थी, जब उसने तलाल के कब्जे से अपना पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए उसे बेहोशी का इंजेक्शन लगाया था।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि तलाल ने यह दिखाने के लिए जाली दस्तावेज बनाए थे कि नर्स ने उससे शादी की थी। इसमें कहा गया था कि तलाल ने निमिषा को प्रताड़ित किया।

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