देश की खबरें | केरल सरकार ने मुल्लापेरियार में बेबी बांध में पेड़ों को काटने की अनुमति से अनभिज्ञता प्रकट की

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कोच्चि, सात नवंबर केरल सरकार ने रविवार को कहा कि मुल्लापेरियार जलाशय में बेबी बांध के रास्ते में 15 पेड़ों को काटे जाने के लिए अनुमति दिये जाने के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने एक दिन पहले रविवार को मुल्लापेरियार में बेबी बांध के अनुप्रवाह में 15 पेड़ों को काटे जाने के लिए अनुमति दिये जाने को लेकर केरल के अपने समकक्ष पिनराई विजयन को धन्यवाद दिया था।

स्टालिन ने कहा था कि जल संसाधन विभाग के उनके अधिकारियों ने उन्हें बताया कि मुल्लापेरियार जलाशय के बेबी बांध के अनुप्रवाह में 15 पेड़ों को काटने की अनुमति केरल के वन विभाग ने दे दी है।

केरल के वन मंत्री ए के शशिंद्रन ने यहां मीडिया से कहा, ‘‘ अगर ऐसी स्थिति है तो सरकार को इसकी सूचना दी जानी चाहिए। जहां तक मैं समझता हूं , मुख्यमंत्री कार्यालय, सिंचाई मंत्री के कार्यालय या मेरे कार्यालय को ऐसे किसी फैसले की जानकारी नहीं है। कुछ गड़बड़ी हुई है। खबरों से पता चलता है कि अनुमति दी गयी है और उन्होंने पड़ काटना शुरू कर दिया है । हमने संबंधित अधिकारियों ने रिपोर्ट मांगी है।’’

स्टालिन ने अपने आभार संदेश में ‘ मुल्लापेरियार बांध को और मजबूत करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने’ तथा केरल में नदी के निचले हिस्से में रह रहे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति तमिलनाडु की कटिबद्धता दोहरायी।

लेकिन इसने केरल में विवाद का रूप ले लिया है क्योंकि राज्य में मुल्लापेरियार में नये बांध की मांग की जा रही है, न कि बेबी बांध को मजबूत करने की।

पीरूमेडू के विधायक वझूर सोमान ने मीडिया से कहा कि प्रधान वन (वन्यजीव) संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव वार्डन ने यह अनुमति दी।

उन्होंने कहा, ‘‘ ...बेबी बांध मजबूत करना राज्य सरकार की नीति के विरूद्ध है और पेड़ों को काटने के ऐसे किसी निर्णय के बारे में राज्य सरकार को सूचित किया जाना चाहिए था। यह ऐसा निर्णय नहीं है जिसे नौकरशाही ले।’’

पूर्व मंत्री एवं यूडीएफ विधायक पी जे जोसेफ ने कहा कि विश्वास नहीं होता कि किसी नौकरशाह ने ऐसा आदेश जारी किया। उन्होंने कहा , ‘‘ तब मंत्री को अपने पद पर बने रहने का हक नहीं है । उक्त आदेश को वापस लिया जाना चाहिए। ’’

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने भी इसका विरोध करते कहा कि इस मुद्दे पर राज्य सरकार की योजना अधिकारियों को बलि का बकरा बनाने की है।

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