देश की खबरें | कैट ने वरिष्ठ अधिवक्ता को अवमानना का दोषी माना, चेतावनी देकर छोड़ा
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नयी दिल्ली, 24 सितंबर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के सेवा मामलों का निर्णय करने वाले कैट ने एक वरिष्ठ अधिवक्ता को अवमानना का दोषी माना है लेकिन उन्हें चेतावनी देकर छोड़ दिया। एक आधिकारिक बयान में बृहस्पतिवार को इस बारे में बताया गया।
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की प्रधान पीठ ने भारतीय वन सेना के उत्तराखंड कैडर के अधिकारी और दिल्ली एम्स में प्रतिनियुक्त पर तैनात किए गए संजीव चतुर्वेदी के मामले में पेश होने वाले अधिवक्ता महमूद प्राचा के व्यवहार का स्वत: संज्ञान लिया। चतुर्वेदी ने अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) के संबंध में अलग-अलग आवेदन दायर कर रखे हैं ।
कैट ने बुधवार को जारी अपने आदेश में कहा कि इस मामले में जो विभिन्न घटनाक्रम हुए हैं, उसमें हम पाते हैं कि याचिकाकर्ता और उनके वकील यानी प्रतिवादी की तरफ से अपने व्यक्तित्व में जोड़ने का प्रयास कहीं अधिक था और इसी उद्देश्य से अधिकरण आसान निशाना बन गया।
प्रतिवादी के अवमाननापूर्ण व्यवहार का हवाला देते हुए कैट ने उन्हें (वकील) अदालत की अवमानना कानून, 1971 की धारा 14 के तहत अवमानना का दोषी ठहराया ।
अधिकरण ने कहा कि इसे पहला मामला मानते हुए उन्हें बस चेतावनी देकर छोड़ा जा रहा है। अगर भविष्य में वह इस तरह का कृत्य दोहराते हैं तो इस मामले में अदालत की अवमानना का दोषी पाए जाने को ध्यान में रखते हुए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
याचिकाकर्ता ने अपनी तरफ से पेश होने के लिए प्राचा की सेवाएं लीं और आठ फरवरी 2019 को उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने एम्स द्वारा दाखिल एक अर्जी खारिज कर दी थी।
मामले में उनसे जिरह के लिए अनुरोध किया गया लेकिन वह (वकील) नहीं आए । उन्होंने दूसरे पक्ष के वकील को नीचा दिखाने का प्रयास करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेशों के मुताबिक उन्हें न्यायाधिकरण के समक्ष दलील देने का कोई अधिकार नहीं है ।
बयान में कहा गया कि अध्यक्ष और प्रतिवादियों पर धौंस जमाने के साथ ही अपने हाव-भाव से उन्होंने अदालत में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति पैदा कर दी।
बयान में कहा गया, उकसावे का कोई परिणाम नहीं निकलते देख प्रतिवादी ने अध्यक्ष पर निजी हमले किए।
बयान के मुताबिक प्राचा और उनके मुवक्किल ने हर चरण में और हर मुमकिन तरीके से अधिकरण के साथ छलावा किया।
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