देश की खबरें | कर्नाटक विस: कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गारंटी योजना समिति का प्रमुख बनाए जाने पर विपक्ष का प्रदर्शन

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बेंगलुरु, 12 मार्च कर्नाटक सरकार की पांच गारंटी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करने वाली समितियों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की नियुक्ति के खिलाफ विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल सेक्युलर (जदएस) विधायकों के विरोध प्रदर्शन के कारण बुधवार को लगातार दूसरे दिन विधानसभा की कार्यवाही बाधित रही।

विपक्ष ने सरकार पर गारंटी योजनाओं की निगरानी के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य बनाकर समानांतर समितियों का गठन कर विधायकों की शक्तियों को ‘कम करने’ का आरोप लगाते हुए तर्क दिया कि राज्य के खजाने से पैसे का इस्तेमाल पार्टी कार्यकर्ताओं को मानदेय देने के लिए नहीं किया जा सकता।

सदन में मंगलवार को विधायकों ने सदन के बीचोबीच आकर प्रदर्शन किया और सरकार से इन सभी समितियों को भंग करने की मांग की।

विपक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि अगर निगरानी जरूरी है, तो समितियों का नेतृत्व विधायकों को करना चाहिए न कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जबकि उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आश्वासन दिया था कि मंत्रिमंडल इस मामले पर विचार करेगा।

बुधवार को कार्यवाही शुरू होने पर भाजपा और जदएस के सदस्यों ने सदन के बीचोबीच आकर अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा।

विधानसभा अध्यक्ष यू टी खादर ने सरकार और विपक्ष दोनों से इस मुद्दे को सुलझाने और सदन की कार्यवाही सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “मैं यह बात सरकार और विपक्ष दोनों से कह रहा हूं।”

भाजपा विधायक सुनील कुमार ने इस कदम की आलोचना की और कहा कि अधिशासी अधिकारी (ईओ) और तहसीलदार के वेतन में 25,000 से 40,000 रुपये की कटौती की जानी चाहिए, क्योंकि सरकार को उन पर भरोसा नहीं है इसलिए गारंटी योजनाओं के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की समितियों को सौंपी है।

उन्होंने कहा, “आप (सरकार) तालुक और जिला स्तरीय समितियों के अध्यक्षों को जो 25,000 और 40,000 रुपये का वेतन दे रहे हैं, उसे उनके (कार्यकारी अधिकारी और तहसीलदार) वेतन से काटें। सरकार को करदाताओं के पैसे से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को वेतन देने में शर्म आनी चाहिए।”

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