देश की खबरें | घूसखोरी मामले में गिरफ्तार कर्नाटक का अधिकारी सर्वोच्च अदालत पहुंचा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. घूसखोरी मामले में गिरफ्तार कर्नाटक के वरिष्ठ अधिकारी जे मंजुनाथ ने इस मामले के एक अन्य आरोपी की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एचपी संदेश के ‘गैर जरूरी टिप्पणी’ करने पर ‘मीडिया ट्रायल’ का आरोप लगाते हुए सर्वोच्च अदालत में गुहार लगाई है। न्यायमूर्ति एचपी संदेश ने बाद में यह भी दावा किया था कि उन्हें उनका तबादला करने की धमकी दी गई।
नयी दिल्ली, 17 जुलाई घूसखोरी मामले में गिरफ्तार कर्नाटक के वरिष्ठ अधिकारी जे मंजुनाथ ने इस मामले के एक अन्य आरोपी की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एचपी संदेश के ‘गैर जरूरी टिप्पणी’ करने पर ‘मीडिया ट्रायल’ का आरोप लगाते हुए सर्वोच्च अदालत में गुहार लगाई है। न्यायमूर्ति एचपी संदेश ने बाद में यह भी दावा किया था कि उन्हें उनका तबादला करने की धमकी दी गई।
न्यायमूर्ति संदेश ने पूछा था कि तत्कालीन बेंगलुरु के शहरी उपायुक्त मंजूनाथ को उनके कार्यालय में काम करने वाले उप तहसीलदार महेश पी एस से जुड़े रिश्वत के मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। न्यायाधीश ने राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को एक ‘संग्रह केंद्र’ करार देते हुए इसके अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) सीमांत कुमार सिंह को ‘दागी अधिकारी’ बताया था।
महेश की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने यह भी दावा किया था कि जमानत याचिका पर विचार करते हुए सुनवाई का दायरा बढ़ाने और उनकी प्रतिकूल टिप्पणी के बाद उन्हें स्थानांतरण की धमकी मिली थी।
मुख्य न्यायाधीश एन वी रमण, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ, जो पहले से ही उच्च न्यायालय की टिप्पणियों के खिलाफ एसीबी और एडीजीपी की दो अलग-अलग अपीलों का संज्ञान ले चुकी है, ने 12 जुलाई को न्यायमूर्ति से मामले में सुनवाई को तीन दिन के लिए स्थगित करने का अनुरोध किया था।
जेल में बंद अधिकारी मंजूनाथ ने टिप्पणी के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया और यह कहते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की है कि उनके खिलाफ कुछ टिप्पणियां उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना की गईं।
मंजूनाथ को चार जुलाई को गिरफ्तार किया गया था और सत्र अदालत ने 11 जुलाई को उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
राज्य सरकार और एसीबी प्रमुख सीमांत कुमार सिंह ने इसके पहले उच्च न्यायालय के आदेश और टिप्पणियों के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सिंह ने अपनी अलग याचिका में न्यायमूर्ति संदेश की प्रतिकूल टिप्पणी को हटाने और उच्च न्यायालय में कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी।
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