देश की खबरें | चुनावों को ‘प्रभावित करने’ में फेसबुक की कथित भूमिका की जेपीसी जांच हो: कांग्रेस

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कांग्रेस ने सोमवार को फेसबुक पर भारत में चुनावों को प्रभावित करने और लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के जरिये जांच होनी चाहिए।

नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर कांग्रेस ने सोमवार को फेसबुक पर भारत में चुनावों को प्रभावित करने और लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के जरिये जांच होनी चाहिए।

पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एक खबर का हवाला देते हुए यह दावा भी किया कि फेसबुक ने खुद को ‘फेकबुक’ में तब्दील कर दिया है। भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी के आरोपों पर फिलहाल फेसबुक की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

दरअसल, अमेरिकी मीडिया की एक खबर में कहा गया है कि फेसबुक के आंतरिक दस्तावेज बताते हैं कि कंपनी अपने सबसे बड़े बाजार भारत में भ्रामक सूचना, नफरत वाले भाषण और हिंसा पर जश्न से जुड़ी सामग्री की समस्या से संघर्ष कर रही है। इसमें यह उल्लेख भी किया गया है कि सोशल मीडिया के शोधकर्ताओं ने रेखांकित किया है कि ऐसे समूह और पेज हैं जो ‘‘ भ्रामक, भड़काऊ और मुस्लिम विरोधी सामग्री से भरे हुए हैं।’’

प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में शनिवार को प्रकाशित खबर के मुताबिक, फेसबुक के शोधकर्ताओं ने फरवरी 2019 में नए उपयोगकर्ता अकाउंट बनाए, ताकि देखा जा सके कि केरल के निवासी के लिए सोशल मीडिया वेबसाइट कैसा दिखता है।

खेड़ा ने संवाददाताओं से बातचीत में यह आरोप लगाया कि भारत में फेसबुक भाजपा की साझेदार के तौर पर काम कर रहा है और उसके एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने फेसबुक की आंतरिक रिपोर्ट वाली खबर का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘हम भारत में चुनावों को प्रभावित करने में फेसबुक की भूमिका की जेपीसी जांच की मांग करते हैं।’’

कांग्रेस प्रवक्ता ने यह दावा भी किया कि फेसबुक भारत में फर्जी पोस्ट के माध्यम से लोगों की राय बदलकर लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठनों की फेसबुक के कामकाज में घुसपैठ हो चुकी है।

खेड़ा ने सवाल किया, ‘‘क्या यह उचित है कि फेसबुक एक विचारधारा को फर्जी पोस्ट, तस्वीरों और विमर्श के जरिये आगे बढ़ाए?’’

उनके मुताबिक, भारत में सिर्फ नौ फीसदी फेसबुक उपयोगकर्ता अंग्रेजी के हैं और उनके पास भी क्षेत्रीय ओं के पोस्ट की जांच-परख करने की कोई व्यवस्था नहीं है।

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