देश की खबरें | जेपीसी ने वन संरक्षण विधेयक में प्रस्तावित सभी संशोधनों को मंजूरी दी

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नयी दिल्ली, 20 जुलाई संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2023 में सभी प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी दे दी है, जिसमें इसकी प्रस्तावना में कुछ बातों को जोड़ा जाना तथा इसका नाम बदलकर इसे वन (संरक्षण एवं संवर्द्धन) अधिनियम करने के प्रस्ताव शामिल हैं।

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य वन होने की पात्रता की शर्तों में स्पष्टता लाना है, जिसके फलस्वरूप वन संरक्षण कानून के दायरे में इस प्रकार के क्षेत्रों को लाया जा सके।

वन (संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2023 को लोकसभा में 29 मार्च को पेश किया गया था और इसे उसी दिन दोनों सदनों की 31-सदस्यीय संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया था।

संसद में बृहस्पतिवार को पेश जेपीसी की रिपोर्ट में कहा गया कि उसे 1309 ज्ञापन मिले हैं, जिसमें विशेषज्ञ, राज्य सरकारों, विभागों, लोक उपक्रमों, मंत्रालयों एवं रक्षा बलों की टिप्पणियां शामिल हैं। समिति को इसके विपक्षी सदस्यों की ओर से चार असहमति टिप्पणियां भी प्राप्त हुई हैं।

मुख्य अधिनियम में जो संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं उनमें कानून की प्रस्तावना में इस बात का उल्लेख समाहित करना है कि भारत वन संरक्षण, जैव विविधता तथा जलवायु परिर्वतन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसमें मौजूदा कानून का नाम बदलकर वन (संरक्षण एवं संवर्द्धन) अधिनियम करने का प्रस्ताव भी शामिल है।

संशोधनों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अधिनियम उन्हीं भूमि पर लागू होगा, जिन्हें 10 अक्तूबर 1980 या उससे पहले किसी सरकारी दस्तावेज में वन के रूप में सरकारी रूप से मान्यता दी गयी हो। यदि वन भूमि को 1980 और 1996 के बीच कानूनी ढंग से गैर वन उपयोग में परिवर्तित कर लिया गया होगा तो कानून प्रभावी नहीं होगा।

कुछ विशेषज्ञों ने पूर्व में इस बात को लेकर चिंता जतायी थी कि संशोधनों से गोदावरम मामले में उच्चतम न्यायालय का 1996 में आया वह निर्णय कमजोर पड़ जाएगा, जिसमें तथाकथित मानद् वनों (जिन्हें वन की तरह सरकारी दस्तावेजों में दर्ज नहीं किया गया है) संरक्षण प्रदान किया गया है।

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