देश की खबरें | 'अदालतों का कर्तव्य है कि उपयोगी और अनुपयोगी वस्तुओं को अलग-अलग करें'
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने हत्या के प्रयास के दोषी एक व्यक्ति को बरी करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि अदालतों का ‘‘यह कर्तव्य है कि उपयोगी और अनुपयोगी चीजों को अलग-अलग करें।’’
नयी दिल्ली, चार अगस्त उच्चतम न्यायालय ने हत्या के प्रयास के दोषी एक व्यक्ति को बरी करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि अदालतों का ‘‘यह कर्तव्य है कि उपयोगी और अनुपयोगी चीजों को अलग-अलग करें।’’
प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमण, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मई 2017 के फैसले को चुनौती देने वाले अपीलकर्ता जय प्रकाश तिवारी की दोषसिद्धि और सजा को रद्द कर दिया। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ उनकी अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्हें हत्या के प्रयास के मामले में दोषी ठहराया गया था।
शीर्ष अदालत के समक्ष अपीलकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन का पूरा मामला शिकायतकर्ता की गवाही और उसकी मां के ‘‘सुने-सुनाए सबूत’’ पर आधारित था।
पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला ‘‘मात्र अनुमानों और अटकलों’’ पर आधारित था और आरोपी द्वारा पेश किए गए सबूतों को अदालत ने गंभीरता से नहीं लिया।
पीठ ने कहा, ‘‘अदालत का कर्तव्य है कि वह उपयोगी और अनुपयोगी वस्तुओं को अलग-अलग करे और सबूतों के ढेर से सच को सामने लाएं।’’
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 14 फरवरी 2003 को अपीलकर्ता और एक सह-आरोपी शिकायतकर्ता के घर गए और उसे बाहर बुलाया। आरोप है कि याचिकाकर्ता ने शिकायतकर्ता पर देसी तमंचा से फायरिंग की और फरार हो गया।
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