विदेश की खबरें | अग्रिम मोर्चे के स्वास्थ्य कर्मियों के लिए कोविड-19 के साथ रहना मुश्किल
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. मेलबर्न, छह सितंबर (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया में कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप के फैलने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ बढ़ गया है तथा स्वास्थ्य कर्मियों को अत्यधिक काम करना पड़ रहा है। अगले कुछ महीनों में स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड-19 के और अधिक रोगियों की देखभाल करनी पड़ सकती है क्योंकि न्यू साउथ वेल्स में अगले दो हफ्ते में संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका है।
मेलबर्न, छह सितंबर (द कन्वरसेशन) ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया में कोरोना वायरस के डेल्टा स्वरूप के फैलने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ बढ़ गया है तथा स्वास्थ्य कर्मियों को अत्यधिक काम करना पड़ रहा है। अगले कुछ महीनों में स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड-19 के और अधिक रोगियों की देखभाल करनी पड़ सकती है क्योंकि न्यू साउथ वेल्स में अगले दो हफ्ते में संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका है।
इस बीच ऑस्ट्रेलिया में टीकाकरण की उच्च दर के साथ ही सीमाओं को पुन: खोलने तथा आवाजाही की स्वतंत्रता बढ़ाने पर जोर है। लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र के लोगों को कोविड-19 के साथ रहना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य कर्मियों को अब तक इससे निपटने के लिए क्या करना पड़ा?
हमने, 2020 में पूरे ऑस्ट्रेलिया में स्वास्थ्य क्षेत्र के अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले कर्मियों पर एक सर्वेक्षण किया था। हमने पाया कि महामारी से स्वास्थ्य कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत असर पड़ा है और अनेक लोगों में मानसिक कमजोरी के लक्षण मिले।
चिंताजनक बात है कि सर्वेक्षण में 7,846 नमूनों में से 70.9 प्रतिशत में भावनात्मक उतार-चढ़ाव के और 40 प्रतिशत में किसी पीड़ा को झेलने के बाद तनाव के मध्यम से गंभीर लक्षण दिखाई दिये। महामारी के पूरे समय स्वास्थ्य क्षेत्र के लोग असंगत तरीके से संक्रमित हुए हैं जिनमें अधिकतर मामले कार्यस्थल पर वायरस संक्रमण के थे।
हमने स्वास्थ्य कर्मियों से महामारी के दौरान कामकाज में दबाव के प्रमुख कारकों के बारे में पूछा। जो निम्न हैं:
लगातार काम करना और व्यावसायिक अड़चनें, अलग-अलग जगह तैनात किया जाना या कामकाज के अधिक घंटे होना, बिना अतिरिक्त वेतन के अधिक समय तक काम करना आदि। इन सबसे जो लोग सर्वाधिक प्रभावित हुए उन्हें सबसे ज्यादा अनुभव कमजोर मानसिक सेहत को लेकर सहना पड़ा।
रोगियों को अच्छे से अच्छा इलाज मुहैया करा पाने के बारे में चिंता, परिवार के सदस्यों को रोगियों से अलग रखना और परिजनों के आने पर पाबंदी के बीच रोगी की मृत्यु के दौरान उनके भावनात्मक समय से निपटने जैसे कारक भी हैं। कार्यस्थल पर सुरक्षित रहने और अस्पतालों से कोविड-19 का खतरा घर तक लाने जैसी चीजों से कर्मियों के परिवारों पर भी असर पड़ा है।
कई स्वास्थ्य कर्मियों को हमने इस पेशे को छोड़ने के बारे में सोचते भी पाया।
अगर इतना सबकुछ है तो क्या बदलाव आया है?
इनमें से किसी मुद्दे का हल नहीं निकला है। स्वास्थ्य कर्मी अब और ज्यादा दबाव का सामना कर रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों के आसपास संक्रमण के जोखिम वाले क्षेत्र चिंता की बड़ी वजह हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वालों के लिए वायरस का खतरा बहुत परेशान करने वाला है और इसके बाद उन्हें कोविड-19 की जांच करानी होती है तथा 14 दिन के पृथक-वास में रहना होता है।
पृथक-वास में अचानक से भेजे जाने के परिणाम दूरगामी होते हैं। आप इतने कम समय के नोटिस पर या बिना नोटिस के पृथक-वास में भेजे जाने पर अपने बच्चों की देखभाल का प्रबंध कैसे करेंगे, इससे आपके जीवनसाथी पर कितना असर होगा और पहले से ही काम के बोझ के तले दबे दूसरे कर्मियों को आपका काम करना होगा। यानी संक्रमण का जोखिम वाला एक ऐसा क्षेत्र सैकड़ों कर्मियों को संकट में डाल सकता है।
स्वास्थ्य कर्मी असीमित तरीके से उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा कोविड-19 जांच क्लिनिक तथा टीकाकरण केंद्रों पर भी कर्मियों की आवश्यकता होती है। ऐसे में हमें अचानक कुछ दूसरे कर्मियों की सेवाएं लेने की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही कुछ स्वास्थ्य सेवाओं को सीमित करना पड़ सकता है।
हमारी स्वास्थ्य प्रणाली कैसे सुदृढ़ हो सकती है?
हमारे सर्वेक्षण में स्वास्थ्य कर्मियों ने इस बारे में भी बताया कि कोविड-19 ने किस तरह व्यवस्था की खामियों को पाटने की जरूरत पर जोर दिया है। सर्वेक्षण में शामिल एक मनोविज्ञानी ने कहा: जो चीजें सही नहीं थीं और जिनकी अनदेखी की गयी, वो और खराब हो गयीं।
ऑस्ट्रेलियन मेडिकल एसोसिएशन भी पूरी व्यवस्था में आमूल-चूल सुधार की जरूरत बता रहा है।
यदि हमें कोविड-19 के साथ ही रहना है तो हमें ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली चाहिए जो ढाई करोड़ लोगों की स्वास्थ्य देखभाल के लिहाज से सामान्य दबाव को झेल सके और कोविड-19 से ग्रस्त लोगों की अल्पकालिक तथा दीर्घकालिक जरूरतों को समझ सके।
स्वास्थ्य कर्मियों का मानसिक स्वास्थ्य न केवल उनके और उनके परिवारों के लिए बल्कि रोगियों की देखभाल से भी जुड़ा विषय है।
स्वास्थ्य ढांचे को महामारी जैसे संकटों का सामना करने के लिहाज से तैयार करने के लिए सहयोगी स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों को शामिल करना और उन्हें अत्यधिक काम के बोझ और थकान से बचाना जरूरी है। अगर हम इन विषयों पर तत्काल ध्यान नहीं दे सके तो हम स्वास्थ्य प्रणाली की अपनी सबसे मूल्यवान पूंजी को खो देंगे।
(द कन्वरसेशन)
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