देश की खबरें | क्या जीएम सरसों की पर्यावरणीय मंजूरी के पीछे कोई बाध्यकारी कारण है : न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. आनुवंशिक रूप से संवर्धित (जीएम) फसलों के कारण पर्यावरण प्रदूषण की चिंता के बीच उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से पूछा कि क्या जीएम सरसों की पर्यावरण मंजूरी देने के पीछे कोई बाध्यकारी कारण रहा है कि ऐसा न करने से देश असफल हो जाएगा।

नयी दिल्ली, एक दिसंबर आनुवंशिक रूप से संवर्धित (जीएम) फसलों के कारण पर्यावरण प्रदूषण की चिंता के बीच उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से पूछा कि क्या जीएम सरसों की पर्यावरण मंजूरी देने के पीछे कोई बाध्यकारी कारण रहा है कि ऐसा न करने से देश असफल हो जाएगा।

शीर्ष अदालत ने कहा कि भारतीय किसान अपने पश्चिमी समकक्षों के उलट साक्षर नहीं हैं और वे 'कृषि मेला' और 'कृषि दर्शन' जैसे आयोजनों के बावजूद जीन और म्यूटेशन के बारे में नहीं समझ पाते हैं और यह एक जमीनी हकीकत है।

केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि कार्यकर्ताओं, विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों द्वारा जीएम फसलों का विरोध वैज्ञानिक तर्क पर आधारित होने के बजाय ‘‘वैचारिक’’ है।

पर्यावरण मंत्रालय के तहत गठित जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (जीईएसी) ने गत 25 अक्टूबर को ट्रांसजेनिक सरसों हाइब्रिड किस्म डीएमएच-11 की पर्यावरणीय मंजूरी दी थी।

न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि से कहा कि जिस सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए वह यह है कि क्या जीएम सरसों के पर्यावरणीय मंजूरी के कारण कोई अपरिवर्तनीय परिणाम होगा।

न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा, ‘‘हम यहां विचारधारा पर बात नहीं कर रहे। जहां तक ​​जीन और म्यूटेशन के बारे में साक्षरता और जागरूकता का संबंध है, हमारे किसान पश्चिमी देशों के किसानों की तरह नहीं हैं। चाहे कितने भी 'कृषि मेले' और 'कृषि दर्शन' (डीडी किसान चैनल पर प्रसारित कृषि पर एक कार्यक्रम) हमारे पास हों। यह जमीनी हकीकत है। हमें हर चीज को समग्रता से देखना होगा।’’

वेंकटरमणि ने कहा कि सवाल मजबूरी का नहीं, बल्कि प्रक्रिया का है और सरकार ने अदालत द्वारा नियुक्त तकनीकी विशेषज्ञ समिति (टीईसी) की ओर से अनुशंसित प्रारूप के अनुसार सभी नियामक प्रक्रियाओं का पालन किया है।

जीएम फसलों के खिलाफ मुहिम चलाने वालीं कार्यकर्ता अरुणा रोड्रिग्स की तरफ से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने बुधवार को पीठ के समक्ष दलील दी थी कि पर्यावरणीय परीक्षण मंजूरी मिलने के बाद जीएम सरसों के बीजों में अंकुरण शुरू हो चुका है और इनमें फूल आने के पहले ही इसके पौधों को उखाड़ दिया जाना चाहिए ताकि पर्यावरण को दूषित होने से रोका जा सके।

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