देश की खबरें | इंद्राणी मुखर्जी ने जेल में उपद्रव को लेकर प्राथमिकी को रद्द कराने के लिए अदालत का रुख किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पूर्व मीडिया कारोबारी इंद्राणी मुखर्जी ने बंबई उच्च न्यायालय का रुख कर जेल में उपद्रव करने और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोप में अपने खिलाफ दर्ज एक मामले को रद्द करने का अनुरोध किया है। मुखर्जी को अपनी बेटी शीना बोरा की कथित तौर पर हत्या के मामले में हाल में जमानत मिली थी।
मुंबई, 30 मई पूर्व मीडिया कारोबारी इंद्राणी मुखर्जी ने बंबई उच्च न्यायालय का रुख कर जेल में उपद्रव करने और पुलिस के काम में बाधा डालने के आरोप में अपने खिलाफ दर्ज एक मामले को रद्द करने का अनुरोध किया है। मुखर्जी को अपनी बेटी शीना बोरा की कथित तौर पर हत्या के मामले में हाल में जमानत मिली थी।
शीना बोरा हत्याकांड में उच्चतम न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने के बाद मुखर्जी 20 मई को भायखला महिला जेल से रिहा हुईं। उन्होंने लगभग सात साल जेल में बिताए।
मुखर्जी ने वकील सना रईस खान के माध्यम से 19 मई को उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिसमें उनके खिलाफ 24 जून, 2017 को मुंबई पुलिस द्वारा भायखला जेल में उपद्रव की घटना के बाद दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने का अनुरोध किया गया।
एक कैदी मंजुला शेट्टी की जेल अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर पिटाई के बाद उपद्रव हुआ था। बाद में उस महिला की मौत हो गई थी। मुखर्जी पर कैदियों को हंगामा करने तथा पुलिस अधिकारियों पर प्लेट और बर्तन फेंकने के लिए उकसाने का आरोप है।
अपनी याचिका में मुखर्जी ने दावा किया है कि उन्हें परेशान करने और प्रताड़ित करने के मकसद से मामले में फंसाया गया। मुखर्जी ने याचिका में कहा है कि वह ‘‘न तो कथित हमले का हिस्सा थीं और न ही वह जेल में उपद्रव शुरू करने की घटना में शामिल थीं।’’
याचिका में मुखर्जी ने कहा है कि उनके खिलाफ ‘‘फर्जी, सामान्य और अस्पष्ट आरोप’’ लगाए गए हैं और उनकी कोई विशेष भूमिका नहीं बताई गई है। उच्च न्यायालय की वेबसाइट के अनुसार याचिका पर एक जून को सुनवाई होने की संभावना है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)